कानपुर, जेएनएन। शहर की आधी आबादी ने जल की बर्बादी रोकने की ठान ली है। तभी तो अलग-अलग क्षेत्रों में युवतियां व महिलाएं जल बचाने के लिए अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। इन्हीं में से एक हैं सुक्खापुरवा टीपी नगर निवासी शिखा भारती, जो पढ़ाई के साथ ही लोगों को एक-एक बूंद का महत्व बता रही हैं। वह पानी की बर्बादी रोकने के साथ ही उसे सहेजने के बारे में भी बताती हैं। कई जगह भूगर्भ रीचार्ज सेंटर बनवाए हैं। कई जिलों में पानी की टेस्टिंग करके खराब हो रहे पानी को शुद्ध करने के उपाय खोजे।

बायोटेक से बीएससी करने वाली शिखा बताती हैं कि बस्ती में दूषित पानी पीने से लोगों को बीमारी हो रही थी। तब फैसला लिया कि पानी के महत्व को बताएंगे। वर्ष 2014 में टीम के साथ सुक्खापुरवा और गोवर्धनपुरवा से पानी दूषित होने से बचाने और बर्बादी रोकने की तैयारी की। पहले लोगों को समझना मुश्किल पड़ता था। अब लोग खुद आगे आने लगे हैं और पानी की बर्बादी नहीं होने देते।

उन्होंने हैंडपंपों में सोक पिट बनाकर नाली में बहने वाले व बारिश के पानी को सहेजने काम किया। बाराबंकी, भदोही, फतेहपुर, बनारस समेत कई शहरों मे पानी के नमूनों को लेकर टेस्ट किया। पानी दूषित होने पर कारण ढूंढ़कर उसे शुद्ध कराया। जल संरक्षण पर जोर देने के साथ ही बरसाती पानी को सहेजने की जानकारी दी। उन्होंने बताया, गड्ढे करके भूगर्भ जलस्तर को बढ़ाया जा सकता है। इससे क्षेत्र का जलस्तर बढ़ेगा। अब लोग उनका साथ दे रहे हैं।

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