चारुतोष जायसवाल, कानपुर : राजा महाराजा व मुगल शासकों के समय चलने वाले कई सिक्कों के बारे में आपने सुना होगा। ऐसे नायाब सिक्कों को देखने की चाहत में लोग या तो इंटरनेट में सर्च करते हैं अथवा किताबों के पन्ने पलटते हैं। अगर आप इन्हें हकीकत में देखना चाहते हैं तो शहर से बाहर जाने की जरूरत नहीं है। बस लालबंगला में रहने वाले शर्मा परिवार के यहां पहुंच कर आपकी ख्वाहिश पूरी हो जाएगी। नायाब कलाकृतियों को संजोकर रखना इस परिवार का शौक है। शहर ही नहीं देशभर से लोग उनके घर पर ये सिक्के देखने आते हैं। यही नहीं प्रदर्शनियों में भी उन्हें आमंत्रित किया जाता है।

लालबंगला बाजार निवासी गो¨वद शर्मा प्रिंटिंग प्रेस चलाते हैं। वह बताते हैं कि उनके पिता बंशीलाल और मां पुराने सिक्के एकत्र करते थे। बचपन में यह देखकर उनके मन में भी रुचि जागी और वह सिक्कों को एकत्र करने लगे। धीरे धीरे उनकी दीवानगी इस कदर बढ़ गई कि देशभर में कहीं भी पुराने सिक्के या पुरातत्व की वस्तु पता चलने पर वहां जाकर उसे मनमाने दाम पर खरीद लेते। आज उनके संग्रहालय में अकबर व शेरशाह सूरी के शासन के अरबी में लिखे सिक्के हैं। मुहम्मद बिन तुगलक के अरबी में लिखे तांबे के सिक्के व ग्वालियर के राजा के सिक्के भी मौजूद हैं। चांदी की इकन्नी, दुवन्नी के साथ 1835 में चलाए गए विलियम चतुर्थ के चांदी के दुर्लभ सिक्के उनके संग्रहालय की शोभा बढ़ा रहे हैं। कई देशों के अलग-अलग नोट भी उनके पास हैं।

आस्ट्रिया का सिक्का है अनमोल

विश्व में जब सिक्कों में वर्ष पड़ने की शुरुआत हुई तो वह आस्ट्रिया का 1780 का सिक्का था। ऐसा अनमोल सिक्का भी गो¨वद के पास है। वहीं प्रथम विश्वयुद्ध का एक मेडल उन्हें लंदन निवासी एक रिश्तेदार से मिला। छात्र व इतिहास के शौकीन लोग उनके घर इस संग्रहालय को देखने आते हैं।

ब्रिटिश अलमारी व अष्टधातु की मूर्ति

अष्टधातु की भगवान बुद्ध की मूर्ति, मुगलकालीन रोशनदान, राजाओं के समय का दीप व भगवान गणेश की पुरानी मूर्ति भी उनके पास है। हाल ही में ब्रिटिश शासनकाल की अलमारी मिली है। बिना वे¨ल्डग के रिपिट पेंच से बनाई जाने वाली ठोस लोहे की अलमारी में लोग रुपये व जेवरात रखकर जमीन में दबा देते थे। इसमें जंग न लगने से लोग जमीन के अंदर गाड़कर बहुमूल्य चीजों को सुरक्षित करते थे।

By Jagran