कानपुर, जेएनएन। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद सरकार को पर्यावरण संरक्षण की सुध आई है। अब जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, एलएलआर अस्पताल (हैलट) और मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल में अलग-अलग सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए जाएंगे। पहली बार लग रहे माड्यूलर एसटीपी की खासियत है कि इससे ट्रीट पानी को रियूज किया जा सकेगा। 

चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के निर्देश पर शासन से जल निगम की कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) की टीम के आर्किटेक्ट सुशील गुप्ता, रेजीडेंट इंजीनियर विकास गिरी और तकनीकी सहायक अभिषेक गुप्ता ने हैलट अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक प्रो. आरके मौर्य से मंत्रणा की। उन्हें शासन की मंशा से अवगत कराया। बताया कि शासन ने अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेन्ट प्लाट बनाने के निर्देश दिए हैं। लखनऊ के लोहिया संस्थान एसटीपी बनकर तैयार हो चुका है। 

हैलट में जल निकासी के हिसाब से एक एमएलडी का एसटीपी बनेगा। इसके लिए 15 सौ वर्ग फुट जगह चाहिए। हैलट के साथ मेडिकल कालेज और चेस्ट अस्पताल में अलग एसटीपी बनाए जाएंगे। एसटीपी में शोधित पानी का इस्तेमाल सिंचाई, धुलाई और टायलेट में किया जाएगा। इससे पानी की बर्बादी पर भी अंकुश लगेगा। प्रमुख अधीक्षक प्रो. आरके मौर्या ने बताया कि एनजीटी ने तीनों जगह अलग-अलग प्लाट बनाने के निर्देश दिए हैं। तीनों प्लाटों के निर्माण में पांच करोड़ रुपये तक खर्च का अनुमान है। बैठक के बाद टीम ने साइट का निरीक्षण कर जगह देखी है। तीनों के अलग डीपीआर बनाकर शासन को दे दी। इसी साल कार्य शुरू करके पूरा भी करना है।

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