महोबा, [अजय दीक्षित]। Ram Navami 2021 बुंदेलखंड तमाम पौराणिक स्थलों का गवाह है। यहीं चित्रकूट में प्रभु राम ने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वनवास काल का लंबा वक्त गुजारा था। महोबा स्थित गोरखनाथ की तपस्थली माने जाने वाले गोरखगिरि के कण-कण में भी सीता-राम हैं। मान्यता है कि भगवान ने सीता व लक्ष्मण के साथ वनवास काल में कुछ समय यहीं पर बिताया था। गोरखगिरि मदनसागर सरोवर को सौंदर्य प्रदान करने वाली पश्चिम दिशा में 270 एकड़ में फैली विंध्य पर्वतमाला का ही एक हिस्सा है। इसकी उच्चतम चोटी धरातल से करीब दो हजार फीट ऊपर है। गिरि की गोद में दो पोखर और कंदराएं हैं।

इतिहासकार संतोष पटेरिया बताते हैं कि महोबा के इतिहास पुस्तक में जिक्र मिलता है कि वीर आल्हा-ऊदल की धरती में गोरखगिरि जाने वाले रास्ते में महोबा-छतरपुर बाईपास पर बाईं ओर करीब 150 मीटर की दूरी पर भगवान शिव की तांडव नृत्य करती प्रतिमा भी है। यहीं से संकरी पगडंडी से आगे बढ़ते हैं। बीच में दो स्थानों पर शिला के दरवाजे मिलते हैं। ऊपर जंगल बेहद घना होता जाता है।

दो किलोमीटर पैदल सफर कर मिलती सीता रसोई: गोरखगिरि की चोटी तक पहुंचने के रास्ते से लेकर ऊपर तक श्रद्धालुओं ने प्रत्येक शिला पर चूने से सीता-राम अंकित कर दिया है। इससे बिना पूछे ही रास्ता पता चलता है। करीब दो किलोमीटर का पैदल सफर तय करने के बाद पर्वत पर सिद्ध बाबा मंदिर के दर्शन होते हैं। उसके पास ही माता सीता की रसोई है। रसोई के निशान अब काफी धूमिल हो चुके हैं।

उजियारी गुफा में प्रभु ने किया था विश्राम: गोरखगिरि में उजियारी गुफा में प्रभु ने माता सीता व लक्ष्मण के साथ कुछ समय विश्राम किया था। गुफा की विशेषता ये है कि यह प्रकाशमान रहती है। इसीलिए इसको उजियारी गुफा कहते हैं। थोड़ी दूर पर ही अंधियारी गुफा है। यहां कल-कल करते झरने, कुएं, वन्य औषधियों व आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के झुरमुट हैं। महोबा का इतिहास पुस्तक के अनुसार, इस गुफा के आकर्षण में ही गुरु गोरखनाथ ने यहां तपस्या की थी। बाद में उन्हीं के नाम पर इस पर्वत का नाम गोरखगिरि पड़ गया।

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