कानपुर, जेएनएन। कोरोना की मार फिर से शहर के उद्योगों पर पडऩे लगी है। छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन और महाराष्ट्र में सख्ती की वजह से कच्चा माल नहीं आ पाने से हार्डवेयर, चर्म, होजरी, फुटवियर, प्लास्टिक और पैकेङ्क्षजग उद्योग के उत्पादन में 60 फीसद की गिरावट आई है। श्रमिकों की संख्या कम हुई है, जबकि औद्योगिक इकाइयों के पास ऑर्डर भी नहीं हैं। ऐसे में तमाम इकाइयां चलाने में मुश्किलें खड़ी होने लगी हैं। यही हालात तीन माह बने रहे तो करीब साल भर के लिए मुश्किलें तय हैं।

टूटने लगी सप्लाई चेन : इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य ने बताया कि मशीन पार्ट व कच्चा माल महाराष्ट्र के साथ दिल्ली एनसीआर से ज्यादा आता है। शहर से लोहा, प्लास्टिक, कपड़ा व खानपान समेत अन्य उत्पादों का घरेलू निर्यात वहां होता है। कोरोना की दूसरी लहर का सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है।

श्रमिकों के पलायन से फिर बढ़ेगा संकट : आइआइए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व टेक्सटाइल उद्यमी तरुण खेत्रपाल ने बताया कि यूपी व बिहार के श्रमिकों ने महाराष्ट्र व दिल्ली समेत अन्य प्रदेशों से पलायन शुरू कर दिया है। इससे दो नुकसान होंगे। पहला यह कि श्रमिक न होने से इन राज्यों में माल बनने की गति बहुत धीमी हो जाएगी। इससे कानपुर समेत अन्य शहरों में कच्चे माल की किल्लत होगी। दूसरा फिर से इन श्रमिकों के सामने काम का संकट गहराएगा।

मुख्य उद्योग व उनका सालाना कारोबार

-होजरी : 500 इकाइयां, एक हजार से 12 सौ करोड़ सालाना कारोबार है

-चर्म : 800 चर्म निर्यात इकाइयां, 8000 करोड़ प्रतिवर्ष कारोबार

-सैन्य उपकरण : 10 इकाइयां, 300 करोड़ का कारोबार

-खान पान : 1500 इकाइयां, 500 करोड़ का कारोबार

-हार्डवेयर : 350 इकाइयां, एक हजार करोड़ का कारोबार

उद्योगों की स्थिति

-शहर में 18 हजार औद्योगिक इकाइयां

-छोटे बड़े मिलाकर 50 से अधिक प्रकार के उद्योग संचालित

-इन सभी उद्योगों में 50 से 60 फीसद की गिरावट आई है

कोरोना काल में चलने वाले उद्योग

-खानपान

-दवा

-मास्क, सैनिटाइजर

-पैकेजिंग

-मशीनरी

-हार्डवेयर

-जूते, बेल्ट समेत दूसरे चर्म उत्पाद।

कहां से क्या माल आता

-पंजाब व रायपुर से लोहा, सरिया, लोहे के एंगिल।

-लुधियाना से खेलकूद व होजरी का सामान।

-दिल्ली, गुजरात व महाराष्ट्र से पॉलीमर।

-जालंधर से फुटवियर व उससे जुड़े उत्पाद।

-गुजरात से पैकेजिंग और उससे जुड़े उत्पाद।

-दक्षिण भारत से खाने वाले मसाले जैसे लौंग, इलायची, गरी, तेज पत्ता आदि।

-भावनगर गुजरात से स्क्रैप, इलेक्ट्रिकल मोटर व जेनसेट।

श्रमिकों पर एक नजर

-04 लाख श्रमिक हैं शहर की औद्योगिक इकाइयां में

-50 हजार से अधिक श्रमिक कम हो गए हैं खेतों की कटाई, कोरोना संकट के कारण

-चर्म उत्पादों के आर्डर कम होने से सबसे ज्यादा श्रमिक यहां घटे हैं।

कानपुर से कौन से उत्पाद कहां जाते

-प्लास्टिक की पैकेजिंग, होजरी, टेक्सटाइल, साबुन व डिटर्जेंट आदि पूरे देश में जाते।

-चर्म उत्पादों की रूस, चीन, यूएस, खाड़ी देश व यूरोप समेत कई देशों तक आपूर्ति

उद्यमियों ने बयां किया अपना दर्द

पिछले साल जैसे हालात बनते जा रहे हैं। होजरी उद्योग चौपट हो गया है। शहर में न कोई व्यापारी आ रहा है और न ही माल जा रहा है। इससे 90 फीसद व्यापार थम गया है। - बलराम नरूला, होजरी उद्यमी

लॉकडाउन होने से रायपुर से हार्डवेयर का कच्चा माल नहीं आ रहा है। उद्योग पटरी पर आ भी नहीं पाया था कि कोरोना की दूसरी लहर ने 50 फीसद से अधिक क्षमता घटा दी है। -अमन घई, हार्डवेयर उद्यमी

सप्लाई चेन कम हो गई है। बाजार से ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। अन्य उद्योगों पर संकट से अब पैकेङ्क्षजग उद्योग पर भी इसका असर पड़ेगा। -अमिताभ तिवारी, पैकेजिंग उद्यमी

निर्यात के लिए कंटेनर नहीं मिल पा रहे हैं। किराया चार से पांच गुना बढ़ गया है। महाराष्ट्र से माल नहीं आ पा रहा है। यहां से तैयार होकर जा रहा माल कई दिनों तक बंदरगाह पर पड़ा रहता है। -सुशील टकरू, सैडलरी निर्यातक

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