जागरण संवाददाता, कानपुर : भले ही अभी तक चिड़ियाघर आने वाले दर्शक यहां 18 हेक्टेयर में फैली झील के बीचोबीच ओपेन बिल स्टार्क, पेंटेड स्टार्क, कारमोरेंट जैसे सुंदर पक्षियों को देखते हों, पर अब वह जल्द ही यहां विदेशी पक्षियों का दीदार भी कर सकेंगे। चिड़ियाघर प्रशासन ने मत्स्य विभाग के साथ मिलकर पक्षियों को बुलाने के लिए अनूठी योजना बनाई है। प्रशासनिक अफसरों ने झील में एक लाख रोहू, कतला और नयन मछलियों के बच्चों को डाला है। इससे जहां झील में ऑक्सीजन की मात्रा कम नहीं होगी, वहीं अच्छी संख्या में मौजूद इन मछलियों को अपना भोजन बनाने के लिए विदेशी पक्षी प्राणिउद्यान में आ सकेंगे।
चिड़ियाघर के निदेशक केके सिंह ने बताया कि अक्टूबर के बाद से जिन विदेशी पक्षियों के आने की उम्मीद जगी है उनमें चीन, यूरोप, तिब्बत व साइबेरिया से आने वाले ग्रेलेग गूज, पिनटेल, काटन टील, रेड क्रेस्टेड पोचर्ड, कूट, मैलर्ड आदि शामिल हैं। बताया गया कि अभी तक जो स्थानीय पक्षी यहां आते हैं, उनमें नकटा, सुरखाब, डुबडुबी, छोटा बगुला, श्वेत ग्रीवा जांघिल, बादामी बगुला शामिल हैं।
मगरमच्छ की बाधा होगी दूर सालों से झील में मौजूद मगरमच्छ को हटाने के लिए भी चिड़ियाघर प्रशासन ने तैयारी कर ली है। 20 मगरमच्छ जहां गोरखपुर चिड़ियाघर में भेजे जाएंगे, वहीं चार मगरमच्छ को गुवाहाटी जू में भेजने का प्रस्ताव बन चुका है। अफसरों व चिकित्सकों ने बताया कि अक्सर ही मगरमच्छ पक्षियों पर हमला कर देते हैं। इसलिए इस समस्या का समाधान साथ-साथ किया जा रहा है।
शंकर की दहाड़ सुन अफसर खुश
चिड़ियाघर में शेर अजय व शेरनी नंदिनी के शावक शंकर की दहाड़ सुन रविवार को अफसर खुश हो गए। हालांकि निदेशक ने कहा कि उसे पूरी तरह स्वस्थ रखने के लिए जल्द आइवीआरआइ बरेली के ंिवशेषज्ञों से संपर्क साधेंगे।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
प्राणिउद्यान निदेशक केके सिंह का कहना है कि चिड़ियाघर में जो हरियाली और वातावरण है, उसमें अगर एक बार विदेशी पक्षी आ जाएंगे तो हमेशा आते रहेंगे। यह बात सोचकर ही झील में एक लाख मछलियों के बच्चों को छोड़ा गया। विदेशी पक्षियों से जू की खूबसूरती बढ़ जाएगी।

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