कानपुर, जेएनएन। जीएसवीएम मेडिकल कालेज कैंपस को संवारने की कवायद शुरू हो चुकी है। इसकी बुनियाद पूर्व प्राचार्य प्रो. आरबी कमल रखकर गए हैं। उन्होंने प्रशासनिक भवन, मेडिकल छात्र-छात्राओं के हास्स्टल एवं जर्जर प्रयोगशालाओं के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव भेज कर शासन से स्वीकृति ले ली थी। शासन ने उनके रहते ही अलग-अलग मद में 23 करोड़ रुपये भी जारी कर दिए थे।

जीएसवीएम मेडिकल कालेज का शुभारंभ वर्ष 1956 में हुआ था। उसके बाद से आज तक भवनों का जीर्णोद्धार नहीं कराया गया है। मुख्य प्रशासनिक भवन के साथ-साथ मेडिकल छात्र-छात्राओं की पढ़ाई के लिए बनाए गए लेक्चर थियेटर और प्रयोगशालाएं हैं। अर्से से मरम्मत नहीं होने से जर्जर हो गए हैं। इसका हवाला देते हुए तत्कालीन प्राचार्य प्रो. आरबी कमल ने शासन को प्रस्ताव भेजा था। कहा गया था कि मेडिकल कालेज के भवन का आॢकटेक्चर डिजाइन अपने आप में अनूठा एवं ऐतिहासिक है।

लंबे समय से मरम्मत न होने से भवन के कई हिस्से जर्जर हो चुके हैं। भवन के बेसमेंट का भी इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इसलिए मरम्मत जरूरी है। साथ ही छात्र-छात्राएं प्रयोगशालाओं में काम करते हैं। उनकी सुरक्षा के लिहाज से मरम्मत जरूरी है। इसे ध्यान में रखते हुए शासन ने प्रस्ताव पर सहमति जताई है।

इनका ये है कहना

मेडिकल कालेज के मुख्य भवन, लेक्चर थियेटर, प्रयोगशाला एवं हास्टल की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। शासन ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके लिए बजट भी आवंटित कर दिया है। जल्द ही कार्यदायी संस्था शुरू कराएगी।

- प्रो. रिचा गिरि, कार्यवाहक प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कालेज। 

Edited By: Akash Dwivedi