कानपुर, जेएनएन। मंडी के अंदर आलू व प्याज पर मंडी शुल्क खत्म करने की मांग को लेकर सोमवार से इनके आढ़तियों ने अनिश्चितकालीन काम बंद कर दिया। चकरपुर सब्जी मंडी में रोज आलू के सवा सौ और प्याज के करीब 80 ट्रक आते हैं, लेकिन सोमवार को बाजार में सन्नाटा रहा। कानपुर आलू आढ़ती एसोसिएशन के उपाध्यक्ष हरीशंकर गुप्ता ने कहा कि जब तक मंडी शुल्क खत्म नहीं होगा तब तक वे मंडी में काम नहीं करेंगे।

मंडी के बाहर शुल्क खत्म होने की वजह मंडी में आलू और प्याज की आवक बहुत कम हो गई थी। संयुक्त व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेश मिश्रा के मुताबिक मंडी में माल बेचने वालों को आलू और प्याज शुल्क लगाकर महंगा पड़ रहा है। बाहर यही माल सस्ता होता है, इसलिए खरीदार भी बाहर ही माल खरीद रहे हैं। अब मंडी में माल बिकना आसान नहीं है। इसी वजह से अनिश्चितकालीन बंदी का आह्वान किया गया था। सोमवार सुबह से ही बाजार में आलू, प्याज के करीब पांच सौ आढ़तियों ने काम बंद कर दिया।

बाहर के कारोबारियों को भी इस बंदी की सूचना मिल गई थी, इसलिए माल भी चार, पांच ट्रक ही आया। इसे भी कारोबारियों ने मंडी के बाहर ही रुकवा दिया। आढ़तियों के मुताबिक पिछले एक माह में आलू की आवक सवा सौ ट्रक से घटकर 20 से 25 ट्रक पर आ गई है। वहीं, प्याज की आवक 80 से घटकर 20 ट्रक हो गई है।

संयुक्त व्यापार मंडल के महामंत्री नीतू सिंह ने कहा कि जिस तरह सब्जी मंडी में दूसरी चीजों का शुल्क एक फीसद कर दिया गया है, उसी तरह आलू, प्याज का कर देना चाहिए क्योंकि यह परिवार की खाद्य सामग्री का हिस्सा है।

नारेबाजी संग प्रदर्शन किया

आढ़तियों ने हाथ में हड़ताल का बैनर लेकर नारेबाजी भी की। उन्होंने मंडी शुल्क वापस लेने के नारे लगाए। साथ ही चेताया कि ऐसा न हुआ तो वे भी बाहर कारोबार शुरू कर देंगे।

 

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