संवाद सहयोगी, पनकी : ट्रकों की हड़ताल की वजह से चकरपुर सब्जी मंडी में आलू सड़ गया है। इसकी सड़ाध से आढ़ती परेशान हैं। सड़े आलू को गाड़ियों से बाहर फेंका जा रहा है। जो थोड़ा बहुत आलू बचा है, उसे कारोबारी औने-पौने दाम में बेचने को मजबूर हैं। पांच दिनों की हड़ताल में अभी तक दस लाख रुपये का आलू सड़ चुका है।

ट्रकों का चक्का जाम होने से चकरपुर मंडी में सन्नाटा पसरा है। यहां आलू के सात सौ आढ़ती हैं। मंडी में आलू के करीब 300 ट्रक रोज आते हैं। सोमवार को बमुश्किल 10 से 15 ट्रक ही आए। वहीं कोई ट्रक बाहर नहीं गया। ऐसे में चार दिन से माल न बिकने से मंडी में तकरीबन बीस टन आलू सड़ गया। सोमवार को ट्रैक्टरों से कई टन सड़ा आलू बाहर फेंका गया।

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सेब और आम हुए महंगे

चौसा व सफेदा आम की आवक रुक गई है। चार दिन पहले चौसा आम के दाम 25 से 30 रुपये प्रति किलो थे। आज इसके दाम 50 से 55 रुपये प्रति किलो रहे। 20 किलो वाली सेब की पेटी चार दिन पहले पंद्रह सौ से दो हजार रुपये की थी। आज यह तीन हजार से 3500 रुपये की रही।

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पल्लेदारों की रोजी पर खतरा

चकरपुर मंडी में दो हजार पल्लेदार काम करते हैं। उनका काम ट्रकों में माल लादना और उतारना है। अब ट्रकों के नाम आने से उनकी कमाई बंद हो गई है।

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स्थानीय किसान सीधे बाजार पहुंच रहे

स्थानीय किसान सीधे गोविंद नगर, कुलीबाजार, रामादेवी जैसी सब्जी मंडियों में पहुंच रहे हैं।

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आवक मात्र दस फीसद रह गई है। आलू सड़ने लगे हैं। हालात नहीं सुधरे तो काफी नुकसान होगा।

- राजेश मिश्रा, अध्यक्ष, संयुक्त व्यापार मंडल चकरपुर मंडी।

Edited By: Jagran