कानपुर, [जागरण स्पेशल]। हम लोगों को समझ सको तो समझो दिलबर जानी, जितना भी तुम समझोगे उतनी होगी हैरानी, अपनी छतरी तुमको देदें कभी जो बरसे पानी...फिर भी दिल है हिंदुस्तानी...। एक फिल्म के गीत के ये बोल सात समंदर पार बैठीं दो जुड़वां बहनों पर एकदम सटीक बैठते हैं। भले ही उनका जन्म भारत में नहीं हुआ है लेकिन एनआरआई माता-पिता की इन जुड़वां बेटियां के अंदर हिंदुस्तानी दिल धड़क रहा है। शायद, यही वजह है कि हजारों किमी दूर बैंठी इन बेटियों को भारत में मुसीबतों का सामना कर रहे प्रवासियों के दर्द का एहसास हुआ है।

कानपुर में है ननिहाल, हर साल आती हैं दोनों बहनें

भारतीय मूल के यशवंत और उनकी पत्नी शिल्पी 2002 की शुरुआत में अमेरिका जाकर बस गए थे। अक्टूबर 2002 में शिल्पी ने अमेरिका में ही जुड़वां बेटियों आरुषि और आविषि को जन्म दिया था। आज कैलीफोर्निया में मोंटा विस्टा स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ने वाली अरुषि व अविषि के दिल आज भी भारत के लिए धड़कते हैं। भारत के उत्तरप्रदेश के शहर कानपुर में रहने वाले नाना बीएसएनएल के सेवानिवृत्त उप महाप्रबंधक अखिलेश कुमार और नानी वीएसएसडी काॅलेज में इतिहास की विभागाध्यक्ष रहीं डाॅ. हेमलता के पास वह प्रतिवर्ष छुट्टियां बिताने आती हैं। उनके नाना और नानी समाजसेवा के कार्य करने वाली विष्णुपुरी एसोसिएशन से जुड़े हुए हैं, दोनों बहनें हर वर्ष यहां आती हैं तो वे भी संगठन से जुड़़कर समाजसेवा के कार्य करती हैं। पिछले वर्ष आने पर उन्होंने नवाबगंज क्षेत्र के ही एक स्कूल में 15 दिन बच्चों को पढ़ाया भी था।

प्रवासियों के वीडियो से द्रवित हुआ मन

डाॅ. हेमलता ने बताया कि कुछ दिन पहले दोनों बहनों ने फोन करके प्रवासी मजदूरों के संबंध में बात की थी। कोराना वायरस के संकट के समय लॉकडाउन में भारत में हाईवे पर चल रहे प्रवासी मजदूरों की फोटो और वीडियो देखकर उनका मन द्रवित हो गया था और दोनों बहनों ने उनके लिए कुछ करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद दोनों बहनों ने अमेरिका में फंड एकत्र करने के लिए विष्णपुरी एसोसिएशन डाॅट ओआरजी के नाम से साइट बना फंड एकत्र किया। इसके बाद एक लाख रुपये भेजकर उन्होंने विष्षुपुरी एसोसिएशन के जरिए प्रवासियों को भोजन की व्यवस्था कराने का अाग्रह किया था।

भोजन बनवाकर बांट रहा एसोसिएशन

डॉ. हेमलता ने बताया कि नातिनों के भेजे गए धन को एसोसिएशन को सौंप दिया, जिससे हर शुक्रवार से विष्णुपुरी एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार गर्ग, उपाध्यक्ष एके सिंह अन्य पदाधिकारियों के साथ भोजन बनवाने के बाद स्टेशन पर आ रहे प्रवासियों को बांटा जाता है। इसके साथ ही थाने में पुलिस कर्मियों को भी लंच पैकट वितरण के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि भोजन करने की मांग करने वालों को दिए जा सकें। उन्होंने बताया कि अभी जो धन उन्होंने भेजा है, उससे भोजन बांट रहे हैं। अगर उन्हें लगेगा तो हो सकता है, आगे वे और फंड भेजें।

Posted By: Abhishek Agnihotri

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