जासं, कानपुर : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर में तीन हजार प्रिंटिंग इकाइयों को नोटिस जारी किया है, जिसमें चार के खिलाफ कार्रवाई की गई है। यह जानकारी शुक्रवार को उप्र नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनिल माथुर ने पर्यावरण के संबंध में बुलाई गई बैठक में दी। इसमें पेड़ पौधों के जरिए जंगल क्षेत्र विकसित करने के लिए कहा गया।

महापौर प्रमिला पांडेय ने 15वें वित्त आयोग के आवंटित धन से शहर को प्रदूषण मुक्त करने के संबंध में बनाई जा रही कार्ययोजना को लेकर नगर निगम में बैठक की। उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारी से पूछा कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे का निस्तारण कैसे होगा। क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि 13 इकाइयों को चिह्नित करके कार्रवाई की संस्तुति की गई है। 32 प्लास्टिक कारोबारियों पर कार्रवाई की है। मेडिकल पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी बायो वेस्ट का निस्तारण कर रही है। गंगा में प्रदूषण के संबंध में बताया कि तीन माह के लिए 65 फीसद इकाइयां बंदी की गई हैं। महापौर ने नाराजगी जताई कि उनके सवालों के सही जवाब नहीं दिए जा रहे। इस पर क्षेत्रीय अधिकारी ने तीन-चार दिन में जवाब बनाकर देने की बात कही। नगर आयुक्त अक्षय त्रिपाठी, मुख्य अभियंता एसके सिंह, रमेश पाल, आरके सिंह, राहुल अवस्थी, आशुतोष विक्रम सिंह रहे। लखनऊ औद्योगिक विकास प्राधिकरण का यूपीसीडा में विलय, कानपुर : लखनऊ औद्योगिक विकास प्राधिकरण (लीडा) का उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) में विलय कर दिया गया है। अब सारी संपत्तियां यूपीसीडा की होंगी और लीडा के अधिसूचित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का विकास, मानचित्र स्वीकृत करने का कार्य भी यूपीसीडा की ओर से किया जाएगा। 28 जुलाई 2005 को लखनऊ और उन्नाव में औद्योगिक विकास विभाग के लिए लीडा का गठन किया गया था। लीडा के अधिकार क्षेत्र में लखनऊ के 47 और उन्नाव के 39 गांवों को शामिल किया गया था। लीडा की स्थापना के बाद कार्य के लिए विभिन्न प्राधिकरणों से अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति पर तैनाती दी गई थी। यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मयूर माहेश्वरी को लीडा का भी मुख्य कार्यपालक अधिकारी बना दिया गया था। अब शासन ने लीडा का विलय यूपीसीडा में कर दिया है तो उसके अधिसूचित क्षेत्र और संपत्तियां भी यूपीसीडा को मिल गई हैं। अब अधिसूचित क्षेत्रों में जल निकासी के लिए नाला, सड़क, मार्ग प्रकाश जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास यूपीसीडा करेगा। शहर में 20 हजार प्रधानमंत्री आवास बनाने का लक्ष्य, कानपुर : शहर में 20 हजार प्रधानमंत्री आवास बनाए जाएंगे। अभी तक करीब 10 हजार आवास बनने की प्रक्रिया में हैं। शुक्रवार को प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार ने वर्चुअल बैठक में अधिकारियों से पूछा कि बाकी 10 हजार आवास कहां और कैसे बनाएंगे, इसकी रिपोर्ट 15 दिन के अंदर भेजें।

कानपुर में करीब 10 हजार प्रधानमंत्री आवास में से महाबलिपुरम में 5,040, सकरापुर में 2,208, जाह्नवी-भागीरथी योजना में 2,208, रामगंगा इनक्लेव में 596 आवास बनाए जा रहे हैं। इन आवासों के लिए लोगों ने रुपये भी जमा करने शुरू कर दिए हैं। इसके अलावा इस वर्ष अक्टूबर, नवंबर में लोगों को उनके आवास दिए जाने लगेंगे। प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार ने वर्चुअल बैठक में कहा कि कानपुर में 20 हजार प्रधानमंत्री आवास का लक्ष्य है। बैठक में केडीए उपाध्यक्ष राकेश सिंह, सचिव एसपी सिंह रहे।

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