जागरण संवाददाता, कानपुर:

करबला के मैदान में शहीद हुए पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों का शबीहे (प्रतीकात्मक) ताबूत निकाला गया। एक-एक ताबूत निकलते रहे और

दिल्ली से आए मौलाना कल्बे रुशैद उनपर यजीद फौज द्वारा किए गए जुल्म बयान करते रहे। इस दौरान वहां मौजूद हजारों लोग ताबूत को कांधा देने के लिए बेताब रहे और फूट-फूटकर रोये।

रविवार को अंजुमन मासूमिया की ओर से मकबरा ग्वालटोली स्थित शिया जुमा मस्जिद में मजलिस के उपरांत हैदरी हाल से सुबह अलम मुबारक निकाला गया और ये अलम जफर मेंहदी के इमामबाड़े पर पहुंचा। मजलिस के उपरांत यहां दोपहर में एक एक शहीद का शबीहे ताबूत निकाला गया। एक एक ताबूत को कांधा देने के लिए काले कपड़ों में हजारों की भीड़ जमा थी।

मौलाना कैसर जौनपुर ने भी शहीद के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उनपर हुए जुल्म की दास्तान सुनाई तो महिलाएं फूट-फूटकर रोने लगीं और लोगों ने मातम किया। इस दौरान या हुसैन की सदायें बुलंद होती रहीं। कासिम अब्बास, जुल्फिकार हुसैन, बाकर मेंहदी, हाजी मुंसिफ अली रिजवी, जिया अब्बास, अफजल हुसैन, आसिफ हूसैन, मिर्जा नदीम, मोहम्मद हाशिम आदि मौजूद रहे।

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रावतपुर करबला में ताजिये दफन

रावतपुर करबला में चहेल्लुम के ताजिये दफन कर दिए गए। इससे पूर्व सैयद नगर अंसारी मोहल्ला, रहमत नगर से इमामबाड़ों से ताजिया जुलूस निकले जो विभिन्न मार्गो से होते हुए करबला पहुंचे।

रविवार को चहेल्लुम पर पोस्ट आफिस रोड पर मेला लगा, जिसमें बच्चों ने झूला और खाने पीने की वस्तुओं का लुत्फ उठाया। डा. निसार अहमद, मोहम्मद इमरान खान, सरफराज खान, आलोक पांडेय, नितिन मिश्रा, बाबू अली, मोहम्मद कलीम, शमशुद्दीन, फजलुरर्हमान, बाबू पांडेय, हमीद खान, सद्दाम हुसैन मौजूद रहे ।

Posted By: Jagran

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