जागरण संवाददाता, कानपुर : कर अपवंचना का खेल करने वाले एक ही ई-वे बिल पर कई-कई बार माल एक स्थान से दूसरे स्थान ले जा रहे हैं। कानपुर शहर में तो यह खेल एक कारोबारी से दूसरे कारोबारी के यहां माल ढोने में हो ही रहा है। इसके साथ ही आसपास के शहरों में भी यही स्थिति है। जीएसटी में 100 किलोमीटर की दूरी तक 24 घंटे में माल पहुंचाने की सुविधा दी गई है। कर अपवंचक इसी का लाभ उठा रहे हैं और कानपुर से लखनऊ, उन्नाव, फतेहपुर, कानपुर देहात जैसे जिलों में एक ही ई-वे बिल पर दिनभर माल ढो रहे हैं। यह ई-वे बिल अगर रास्ते में चेक हो गया तभी उसके बाद दूसरा ई-वे बिल जेनरेट होता है।

आसपास के जिलों में 24 घंटे में कई बार माल लाया और ले जाया जा सकता है। जब कभी एक ही शहर में एक ही माल ज्यादा मात्रा में ले जाया जाना होता है तो कारोबारी और ट्रांसपोर्टर मिलकर इस तरह का खेल करते हैं। जो सामान और जो मात्रा एक ई-वे बिल में दर्शाई जाती है, हर बार वही सामान उसी मात्रा में भेजी जाती है ताकि माल रोक कर चेक हो जाए तो भी उसे पकड़ा ना जा सके। ई-वे बिल जब समय के हिसाब से खत्म हो जाता है तो दूसरा ई-वे बिल जेनरेट कर यह खेल शुरू हो जाता है। इस बीच अगर गाड़ी रोककर ई-वे बिल और इनवाइस चेक कर लिया गया तो अधिकारी उसे वैरीफाई कर देता है। इसके बाद कारोबारी दूसरा ई-वे बिल जारी करते हैं क्योंकि अगली बार गाड़ी पकड़े जाने पर जुर्माना हो जाएगा। इस तरह के मामले सुपाड़ी के कारोबार में पिछले दो माह में काफी पकड़े गए हैं। अधिकारी इन सभी को आपस में जोड़कर पड़ताल कर रहे हैं। एक ही ई-वे बिल के कई बार इस्तेमाल करने के मामले पकड़े गए हैं। नियमों का लाभ उठाकर कर अपवंचक एक ही ई-वे बिल का कई बार इस्तेमाल कर लेते हैं। इसका एक ही रास्ता है कि हर गाड़ी चेक हो सके।

- पीके सिंह, एडीशनल कमिश्नर ग्रेड वन जोन वन, वाणिज्य कर विभाग।

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फास्टैग के बाद भी लगाए जा रहे जुर्माने पर भड़के व्यापारी

जागरण संवाददाता, कानपुर : फास्टैग लगाने के बाद भी आरएफआइडी के लिए लगाए जा रहे जुर्माने से ट्रांसपोर्टर नाराज हैं। उन्होंने सोमवार को वाणिज्य कर विभाग के एडीशनल कमिश्नर ग्रेड वन पीके सिंह से मुलाकात की।

ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि सचल दस्ता जांच के नाम पर उत्पीड़न कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन डिवाइस (आरएफआइडी) लगाने पर सहमति बनी थी तो कहा गया था कि जिन वाहनों पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के टैग लगे होंगे, उन पर आरएफआइडी लगाने की बाध्यता नहीं होगी। शुरू में सबकुछ ठीक चलने के बाद अब एक पखवाड़े से फास्टैग लगीं गाड़ियों के मालिकों पर, आरएफआइडी न लगे होने की बात कह कर, जुर्माना लगाया जा रहा है। यह जुर्माना भी दो हजार से 25 हजार के बीच है, इसलिए अवैध वसूली भी हो रही है। वार्ता के दौरान यूपी मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश गांधी, महामंत्री मनीष कटारिया, संरक्षक केसी शर्मा, कोषाध्यक्ष एबी त्रिपाठी, लोकल ट्रक यूनियन अध्यक्ष अब्दुल वहीद, राजेंदर सिंह सेठी, यतीश सिंह, अरुण वाधवा, गुलशन छाबड़ा, आनंद अग्रवाल, मंगल सिंह, शैलेंद्र सिंह भदौरिया मौजूद रहे।

................ एक ई-वे बिल पर लग रहे चार-चार चक्कर

जागरण संवाददाता, कानपुर : कर अपवंचना का खेल करने वाले एक ही ई-वे बिल पर कई-कई बार माल एक स्थान से दूसरे स्थान ले जा रहे हैं। कानपुर शहर में तो यह खेल एक कारोबारी से दूसरे कारोबारी के यहां माल ढोने में हो ही रहा है। इसके साथ ही आसपास के शहरों में भी यही स्थिति है। जीएसटी में 100 किलोमीटर की दूरी तक 24 घंटे में माल पहुंचाने की सुविधा दी गई है। कर अपवंचक इसी का लाभ उठा रहे हैं और कानपुर से लखनऊ, उन्नाव, फतेहपुर, कानपुर देहात जैसे जिलों में एक ही ई-वे बिल पर दिनभर माल ढो रहे हैं। यह ई-वे बिल अगर रास्ते में चेक हो गया तभी उसके बाद दूसरा ई-वे बिल जेनरेट होता है।

आसपास के जिलों में 24 घंटे में कई बार माल लाया और ले जाया जा सकता है। जब कभी एक ही शहर में एक ही माल ज्यादा मात्रा में ले जाया जाना होता है तो कारोबारी और ट्रांसपोर्टर मिलकर इस तरह का खेल करते हैं। जो सामान और जो मात्रा एक ई-वे बिल में दर्शाई जाती है, हर बार वही सामान उसी मात्रा में भेजी जाती है ताकि माल रोक कर चेक हो जाए तो भी उसे पकड़ा ना जा सके। ई-वे बिल जब समय के हिसाब से खत्म हो जाता है तो दूसरा ई-वे बिल जेनरेट कर यह खेल शुरू हो जाता है। इस बीच अगर गाड़ी रोककर ई-वे बिल और इनवाइस चेक कर लिया गया तो अधिकारी उसे वैरीफाई कर देता है। इसके बाद कारोबारी दूसरा ई-वे बिल जारी करते हैं क्योंकि अगली बार गाड़ी पकड़े जाने पर जुर्माना हो जाएगा। इस तरह के मामले सुपाड़ी के कारोबार में पिछले दो माह में काफी पकड़े गए हैं। अधिकारी इन सभी को आपस में जोड़कर पड़ताल कर रहे हैं।

एक ही ई-वे बिल के कई बार इस्तेमाल करने के मामले पकड़े गए हैं। नियमों का लाभ उठाकर कर अपवंचक एक ही ई-वे बिल का कई बार इस्तेमाल कर लेते हैं। इसका एक ही रास्ता है कि हर गाड़ी चेक हो सके।

- पीके सिंह, एडीशनल कमिश्नर ग्रेड वन जोन वन, वाणिज्य कर विभाग।

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