कन्नौज, जेएनएन। ठठिया के दौलतपुर गांव में आतिशबाज के घर रखे बारूद और आतिशबाजी में विस्फोट से मकान तहस-नहस हो गया। पुलिस व ग्र्रामीणों ने मलबे से एक क्षत-विक्षत शव व चार-पांच घायलों को निकाला। घायलों को मेडिकल कालेज तिर्वा भेजा गया है। मरने वाले की पहचान जलालुद्दीन की बेटी खुशबू के रूप में हुई। देर रात तक राहत कार्य चलता रहा।

रविवार रात करीब साढ़े आठ बजे बिस्मिल्लाह आतिशबाज के घर हुआ विस्फोट इतना तेज था कि मकान की छत उड़ गई और काफी दूर तक मलबा फैल गया। धमाके से मकान का मुख्य दरवाजा 500 मीटर दूर जा गिरा। आवाज सुनकर आसपास गांवों में लोग दहल उठे। दो किमी दूर तक तेज धमाका सुन लोग आतंकी हमले की आशंका जता रहे थे। काफी देर तक मकान से धूल-धुएं का गुबार उठता रहा।

भीड़ में कोई भी मलबे के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। इस बीच पुलिस आने पर लोगों ने मलबा हटाना शुरू किया तो उसमें एक क्षत-विक्षत शव मिला, जिसके सिर और पैर गायब हैं। वहां से निकाले गए चार घायलों को मेडिकल कॉलेज भिजवाया गया। हादसे के एक घंटे बाद भी फायर ब्रिगेड नहीं पहुंची। थाना प्रभारी विजय बहादुर वर्मा ने बताया कि जेसीबी से मलबा हटवाया गया।

प्रशासन का दावा, खाना बनाते समय हुआ विस्फोट

घटनास्थल पर पहुंचे जिला प्रशासन और पुलिस का दावा है कि खाना बनाते समय सिलेंडर में विस्फोट होने से यह हादसा हो गया। पुलिस के मुताबिक शब्बो गैस चूल्हे पर खाना बना रही थी। उसी समय सिलेंडर में आग लग गई। इससे विस्फोट हो गया, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि विस्फोट आतिशबाजी की बारूद से हुआ है। डीएम रवींद्र कुमार का कहना है कि प्रारंभिक जांच में गैस सिलेंडर फटने से विस्फोट होने की वजह सामने आ रही है। जांच के लिए फोरेंसिक टीम को लगाया गया है। हादसे की उच्चस्तरीय जांच कराएंगे। नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

गांव के बाहर कारखाना, घर में गोदाम

आतिशबाज बिस्मिल्लाह का कारखाना गांव से काफी दूर गौरीशंकर मंदिर के पास है, लेकिन विस्फोट से आशंका है कि वह बारूद और आतिशबाजी का स्टाक घर पर ही रखता होगा। हादसे के बाद तिर्वा एसडीएम मौके पर पहुंचे।

25 साल पहले विस्फोट में गई थी विस्मिल्लाह की जान

दौलतपुर गांव में विस्फोट से हादसा पहली बार नहीं है। 25 साल पहले बिस्मिल्लाह के पति मिड़ई की मौत भी ऐसे ही विस्फोट में ही हुई थी, उस समय कच्चा मकान था। ग्रामीणों की माने तो आतिशबाजी का लाइसेंस बिस्मिल्लाह के नाम है और इनके यहां कई सालों से आतिशबाजी बनाने का कारोबार होता है। ग्रामीणों ने बताया कि दिन में ये लोग गांव से दूर कारखाने में आतिशबाजी बनाते हैं और शाम को तैयार हो जाने के बाद उसे घर में जमा कर लेते हैं।

Posted By: Abhishek

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस