कानपुर, जेएनएन। एक आइडिया जो बदल दे जिंदगी.., कुछ ऐसा ही करके दिखाने वाले युवाओं की नई सोच के साथ शुरू स्टार्टअप ने आमजन को सस्ते उत्पादों की सौगात दी है तो हर माह लाखों की आमदनी भी हो रही है। सस्ती जीवनरक्षक प्रणाली, नैनो फिल्टर मास्क व पारदर्शी ईंट की दीवार समेत कई उत्पाद इसकी बानगी भर हैं। यह कमाल है शहर में आइआइटी, एचबीटीयू, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय व आंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर हैंडीकैप्ड में स्थापित इंक्यूबेशन सेंटर से जुड़े बीटेक व एमटेक के छात्रों का। इनके प्रयासों से उद्योग जगत को तो रफ्तार मिली ही है, अमजन की जरूरतें भी पूरी हो रही हैं। 

फूलों से बना रहे अगरबत्ती

फूलों से चमड़े का विकल्प तलाशने के साथ उससे कार्बन रहित अगरबत्ती व पर्यावरण मित्र थर्माकोल बनाने वाले आइआइटी के बायोमेट्रिक स्टार्टअप ने उद्योग लगाया है। इनको विकसित कर प्रदूषण की समस्या का निदान तलाशने के लिए इंडियन एंजल नेटवर्क 'आइएएन' ने साढ़े 10 करोड़ का अनुदान दिया है। आइआइटी के स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर में स्थापित इस बायोमेट्रिक स्टार्टअप के संस्थापक काकादेव निवासी अंकित अग्रवाल व प्रतीक कुमार को मिला इतना अनुदान अब तक यूपी के किसी स्टार्टअप को नहीं मिला।

यूरोप व अमेरिका तक फैलाया कार्बन मास्क

ई-स्पिन नैनो टेक्नोलॉजी के संस्थापक व आइआइटी के पूर्व पीएचडी छात्र डॉ. संदीप पाटिल ने कोरोना काल में कार्बन व नैनो फिल्टर मास्क बनाकर देश में ही नहीं यूरोप व अमेरिका तक कारोबार फैलाया। यह मास्क बैक्टीरिया व वायरस से बचाव के साथ ही उन्हें फंसाकर मार देता है।

किसी भी कमरे को बनाएं आइसीयू

टेकब्लेज टेक्नोलॉजिकल सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड स्टार्टअप के तहत एचबीटीयू के सिविल इंजीनियरिंग के पूर्व छात्र शिवशंकर उपाध्याय व मैनेजमेंट के पूर्व छात्र शुभांकर बंका के बनाए वेंटीलेटर से किसी भी कमरे को इंटेसिव केयर यूनिट 'आइसीयू' बनाया जा सकता है। महज 80 हजार के वेंटीलेटर से एक साथ 10 मरीजों को लाइफ सपोर्ट दिया जा सकता है। इस वेंटीलेटर में लगे रेस्पेरेटरी चैनल को सैनिटाइज करके दूसरे मरीज पर लगाया जाता है, जबकि इसमें दूसरा मरीज आने पर यह पूरा चैनल बदला जा सकता है, जिससे संक्रमण का डर नहीं रहता। इसकी सप्लाई शुरू हो गई है। असम सरकार भी इसे खरीदना चाह रहा है।

आइडिया की कोई कमी नहीं है

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर समन्वयक डॉ. राशि अग्रवाल ने बताया कि छात्रों के पास आइडिया की कोई कमी नहीं है। सरकार से लाभ मिलने पर अधिक से अधिक युवा स्टार्टअप स्थापित करके दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं।

Posted By: Abhishek Agnihotri

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