उन्नाव, जेएनएन। गंगा नदी पर 131 साल पुराने रेलवे पुल का अप हिस्सा रेल संरक्षा और यात्री सुरक्षा के लिहाज से असुरक्षित होने की रिपोर्ट पर जांच करने आए चीफ ब्रिज इंजीनियर वीपी सिंह हकीकत देखकर अवाक रह गए। ट्रैक किनारे लोहे की चादर गलने से बड़े-बड़े सुराख दिखे तो सेक्शन इंजीनियर ने लोहे के टुकड़े गंगा नदी में गिरने की बात कुबूली। गल चुकी चादर और मियाद पूरी कर चुके टर्फ बदलने तक पुल पर कॉशन रहने की बात कही। उन्होंने समांतर नया पुल बनाने की संभावनाओं को भी तलाशा।

ब्रिटिश शासन काल में बना था पुल

ब्रिटिश शासन ने साल 1888 में गंगा नदी पर रेलवे पुल बनवाया था। करीब 900 मीटर इस पुल के पिलर में आई दिक्कत को साल 1990 में रेलवे ने दुरुस्त कराया था। डाउन हिस्से के सड़े टर्फ को नवंबर 2016 में 29 दिन का मेगा ब्लाक लेकर बदला गया था। इस दौरान अप हिस्से का टर्फ भी जांचा गया था। कोई खास दिक्कत न बताते हुए स्थानीय रेल प्रशासन ने रिपोर्ट मुख्यालय को दे दी थी। साल 2018 में करीब 20 दिन का ब्लाक लेकर ट्रैक और स्लीपर बदले गए। लोहे की चादर गलने से गिट्टी की भरपाई में लोहे के टर्फ में दिक्कत महसूस की गई। किनारों पर बड़े-बड़े सुराख हो चुके हैं। ऐसे में अन्य ट्रेनों के साथ हाईस्पीड तेजस का परिचालन पुल से हो रहा है। खतरा होने पर ट्रेनों को अप व डाउन में 45 व 75 किमी का कॉशन देकर चलाया जा रहा।

चीफ ब्रिज इंजीनियर ने देखी पुल की स्थिति

पुल के अप हिस्से की जर्जर तस्वीर व खबर को जागरण ने नौ सितंबर के अंक में 'उन्नाव गंगा रेल पुल पर ट्रेनों के लिए खतरा' शीर्षक से प्रकाशित किया था। लखनऊ रेल मंडल ने स्थानीय स्तर पर रिपोर्ट जुटाई। इसके बाद उत्तर रेलवे मुख्यालय दिल्ली को गंगा रेलवे पुल की रिपोर्ट भेजी। रेलवे बोर्ड के आदेश पर रविवार को चीफ ब्रिज इंजीनियर वीपी सिंह ने पुल का मुआयना किया। उनके साथ सेक्शन के इंजीनियर में शैलेंद्र कुमार, एईएन राहुल जब्बरवाल आदि मौजूद रहे।

Posted By: Abhishek

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