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यहां मुफ्त में बनाए जाते हैं अफसर

Publish Date:Sun, 14 Jan 2018 01:33 AM (IST) | Updated Date:Sun, 14 Jan 2018 01:33 AM (IST)
जागरण संवाददाता, कानपुर : आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को यूं तो तमाम संस्थाएं पढ़ाई

जागरण संवाददाता, कानपुर : आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को यूं तो तमाम संस्थाएं पढ़ाई में सहयोग करती हैं, लेकिन मुफ्त में सिविल सर्विसेज की परीक्षा के लिए तैयारी कराने वाली संस्थाएं शायद ही मिलें। कानपुर में एक संस्था मुफ्त में मेधावियों को अफसर बना उनके सपने साकार करने में मदद कर रही है। पांच वर्ष से मेधावियों को निश्शुल्क कोचिंग दे रही यह टीम अब तक 37 पीसीएस अफसर बना चुकी है।

रघुनाथ चैरीटेबल ट्रस्ट, रोटरी क्लब ऑफ सूर्या से जुड़े उद्यमी ओमप्रकाश डालमिया और आरके सफ्फड़ ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को आइएएस और पीसीएस अफसर बनाने के लिए 2011 में सर वी कैन संस्था बनाई। इसका उद्देश्य ऐसे बच्चों को आगे लाना था जिनकी आंखों में अफसर बनने के सपने हों। आज यह संस्था अपने छठे वर्ष में चल रही है और 60 मेधावियों का बैच यहां सिविल सर्विसेज की कोचिंग पा रहा है।

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कुछ लोगों की मदद से शुरुआत

संस्था से जुड़े लोगों के पास हर वर्ष दो-तीन लोग आ ही जाते थे जिनकी कोचिंग की व्यवस्था करनी होती थी। इसे देख निर्णय लिया गया कि सिविल सर्विसेज की परीक्षा के लिए मुफ्त कोचिंग शुरू की जाए, जिसका पूरा खर्च संस्था उठाएगी।

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कई जिलों में होती प्रवेश परीक्षा

संस्था प्रदेश के करीब एक दर्जन जिलों में प्रवेश परीक्षा कराती है। इसमें कानपुर, कानपुर देहात, कन्नौज, उरई, हमीरपुर, उन्नाव, बांदा, महोबा, इटावा, फैजाबाद में प्रवेश परीक्षा होती है। प्रवेश परीक्षा से 200 के करीब मेधावी चुने जाते हैं। साक्षात्कार के जरिए इनमें से 55 से 60 मेधावी कोचिंग के लिए फाइनल किए जाते हैं। इनसे पूरे वर्ष भर की पढ़ाई का कोई शुल्क नहीं लिया जाता। जो स्नातक कर चुके हों या स्नातक के आखिरी वर्ष में हों, वे इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। जुलाई में यह परीक्षा होती है। पिछली प्रवेश परीक्षा में 2,750 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे।

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सात घंटे का समय

आर्य नगर चौराहा के पास चलने वाली इस कोचिंग का समय बहुत लंबा है। सुबह नौ बजे शुरू होने वाली कोचिंग शाम चार बजे तक चलती है।

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संस्थान की अपनी लाइब्रेरी

संस्थान की अपनी लाइब्रेरी है जहां से मेधावी अपनी जरूरत के हिसाब से किताबें लेते हैं ताकि उनकी पढ़ाई में कोई समस्या न रहे।

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वर्ष में एक भी दिन की छुंट्टी नहीं

कोचिंग में एक भी दिन की छुंट्टी नहीं रहती है। कोचिंग में पांच फैकल्टी हैं। चार फैकल्टी सोमवार से शुक्रवार तक पढ़ाते हैं। शनिवार और रविवार को इलाहाबाद से आने वाले फैकल्टी बच्चों को पढ़ाते हैं।

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पांच वर्ष में अब तक 37 युवा पीसीएस की परीक्षा पास कर चुके हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में मेधावी बैंक, सेना व अन्य क्षेत्र में नौकरी पा चुके हैं। संस्था सारा खर्च अपनी तरफ से करती है।

- आरके सफ्फड़, संयोजक।

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