जागरण संवाददाता, कानपुर : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गंगा में प्रदूषण रोकने की तमाम कवायदों के बाद भी टेनरियां बेलगाम हैं। इनका 'जहर' गंगाजल में घुल रहा है। ताजा रिपोर्ट पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की नाराजगी के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब टेनरियों के गढ़ में जाकर गंगा की निगहबानी की तैयारी कर ली है। इसके लिए जाजमऊ में बोर्ड नया दफ्तर खोलेगा, जहां से रोज गंगा की 'सेहत' पर नजर रखी जाएगी और टेनरियों पर त्वरित कार्रवाई होगी। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दफ्तर अभी पनकी में है, जहां से टेनरियों पर नजर रखना आसान नहीं। ऐसे में जाजमऊ में अलग दफ्तर खोला जा रहा है। इसमें सहायक पर्यावरण अभियंता, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी और उनकी टीम बैठेगी। यह गंगा की हर दिन की मानीट¨रग रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को भेजेगी।

सीपीसीबी और यूपीपीसीबी की कार्रवाई के बाद भी टेनरियों से क्रोमियम व अन्य हानिकारक पदार्थो का उत्प्रवाह मानक से अधिक मिल रहा है। पिछले दिनों एचबीटीयू, बीएचयू और आइआइटी के विशेषज्ञों के सर्वे में इसका खुलासा हुआ। उनकी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची तो खलबली मच गई। सीपीसीबी ने एनजीटी के निर्देशों को ध्यान में रखकर चार दर्जन से अधिक इकाइयों पर जुर्माना लगाया। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को भी फटकार लगाई गई और गंगा की लगातार निगरानी के लिए निर्देशित किया गया। जाजमऊ में बनने वाला कार्यालय क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी के अधीन रहेगा। यह कार्यालय को किराये के भवन में खोला जाएगा।

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इनको जिम्मेदारी

-आशुतोष पांडेय, सहायक पर्यावरण अभियंता

-विनय दुबे, सहायक वैज्ञानिक

-शानू सोनकर, सहायक वैज्ञानिक

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आउटसोर्स से रखे जाएंगे कर्मचारी

जूनियर रिसर्च फेलो- 2

कंप्यूटर आपरेटर- 1

मल्टी टास्किंग- 1

चपरासी- 1

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जाजमऊ में सहायक पर्यावरण अभियंता स्तर का एक उप कार्यालय खोला जा रहा है। इससे औद्योगिक इकाइयों के उत्प्रवाह की नियमित जांच और कार्रवाई हो सकेगी।

-कुलदीप मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कानपुर

Posted By: Jagran

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