कानपुर, [विक्सन सिक्रोडिय़ा]। दिमाग जैसा इशारा देगा, नकली हाथ वैसा ही काम करेगा। सामने रखा चाय का कप या फिर पानी भरा गिलास सभी कुछ उठाएगा। रबर और फाइबर से बना हाथ बिल्कुल असली की तरह होगा। यह करिश्मा किया है हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के पूर्व छात्र घनश्याम ने, उïन्होंने मायो इलेक्ट्रिक आर्म (कृत्रिम हाथ) बनाया है। स्प्रिंग, सर्वो मोटर, एंप्लीफायर सर्किट, माइक्रो कंट्रोलर व इलेक्ट्रोड का इस्तेमाल करके बनाया गए इस कृत्रिम हाथ प्रोजेक्ट के गाइड व विभागाध्यक्ष प्रो. यदुवीर सिंह ने माया इलेक्ट्रिक आर्म का पेटेंट फाइल किया है।

नकली हाथ इस तरह करेगा काम

कृत्रिम हाथ का मैकेनिज्म इस तरह से तैयार किया गया है कि यह शरीर के करंट से संचालित होता है। प्रो. यदुवीर सिंह ने बताया कि इसे बायोनिक करंट कहते हैं। हमारा दिमाग जो निर्देश देता है, इसी करंट से हाथ चीजों को उठाने, रखने, दरवाजा खोलने व खान-पान की वस्तुएं उठाने जैसे कार्यों को करता है। मायो आर्म में छोटे-छोटे मैकेनिकल लीवर लगाए गए हैं, जो स्प्रिंग व सर्वो मोटर, कैंप इलेक्ट्रोड व एंप्लीफायर सर्किट के साथ मिलकर उसे चलाते हैं।

शरीर के करंट से होगा संचालित

इलेक्ट्रिक आर्म शरीर में उत्पन्न संचारित करंट और दिमाग के दिशा-निर्देश पर काम करेगा। शरीर के बायोनिक करंट को एंप्लीफायर पांच माइक्रो वोल्ट से लेकर 15 माइक्रो वोल्ट में बदल देता है। पांच माइक्रो वोल्ट करंट से हाथ गिरता है और 15 माइक्रो वोल्ट के करंट से उठता है। इसमें लगे तीन इलेक्ट्रोड अपना सिग्नल माइक्रो कंट्रोलर के पास भेजते हैं। इस क्रिया के दौरान हाथ दिमाग के दिए गए निर्देश पर काम करने लगता है।

गिलास उठाने, प्लेट उठाने व चीजों को उठाकर रखने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने शोध में पाया है कि दिमाग से हाथों को सिग्नल मिलते हैं। डिवाइस व इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के जरिये कृत्रिम हाथ इन सभी निर्देशों का पालन करता है। इस हाथ को रबर व फाइबर का इसलिए बनाया गया है क्योंकि यह वास्तविक हाथ की तरह आसानी के साथ काम कर सके।

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Posted By: Abhishek