कानपुर [चंद्रप्रकाश गुप्ता]। उलझी हुई परिस्थितियों के बाद सीबीआइ में निदेशक पद की जिम्मेदारी जिस शख्स के हाथ में आई है, वह शतरंज की बिसात के माहिर खिलाड़ी भी हैं। पढ़ाई के दौरान उन्होंने न केवल पढऩे में मन लगाया बल्कि शतरंज के मोहरों की सही चाल से इंटर कॉलेज चैंपियनशिप भी जीती।

राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता के भी चैंपियन रहे। बात हो रही है, मूल रूप से ग्वालियर के रहने वाले और सीबीआइ के नव नियुक्त निदेशक ऋषि कुमार शुक्ल की। शतरंज उनका पसंदीदा खेल है। साथ ही टेबल टेनिस में भी वह गजब की फुर्ती दिखाते हैं।

ऋषि कुमार शुक्ल ने करीब 38 वर्ष पहले कानपुर में वीएसएसडी कालेज में बीकॉम की पढ़ाई के लिए प्रवेश किया था। तब स्वरूपनगर में बृजेंद्र स्वरूप पार्क के पास अपनी बुआ सुशीला अवस्थी के घर रहते थे। बुआ के बेटे और लीलामणि अस्पताल के प्रबंधक राघव शरण अवस्थी उनके जिगरी दोस्त हैं।

राघव बताते हैं, ऋषि शुक्ला का पैतृक घर ग्वालियर के लाला बाजार में है लेकिन दूसरी कक्षा के बाद हायर सेकेंड्री तक की पढ़ाई उन्होंने कोलकाता से की थी। वहां उनके इंजीनियर पिता स्व. बालकृष्ण शुक्ला का फाइबर ग्लास शीट बनाने का कारोबार था। ऋषि पढ़ाई में हमेशा तेज रहे।
उनका आइआइटी कानपुर की इलेक्ट्रिकल ब्रांच में सेलेक्शन हो गया। पिता चाहते थे बेटा बड़ा अफसर बने तो वह सिविल सर्विसेज की तैयारी भी करने लगे। आइआइटी में दाखिला लेने के कुछ माह बाद ही पिता का देहांत हो गया, तो उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़ दी और वीएसएसडी कालेज में बीकॉम में एडमिशन ले लिया। मेहनत रंग लाई और वह आइपीएस बन गए। साथ ही तीन बैंकों की पीओ परीक्षा में भी सफलता पाई।

शतरंज की कई प्रतियोगिताएं जीतीं
कालेज की पूर्व छात्र परिषद के संयोजक डा. मनोज अवस्थी ने बताया कि ऋषि शुक्ला ने शतरंज के साथ टेबल टेनिस की कई प्रतियोगिताएं जीतीं। इंटर कालेज चैंपियनशिप में राघव ऋषि के पार्टनर थे। खाने में बुआ के हाथ का कढ़ी चावल, सिनेमा में राजेंद्र कुमार व अमिताभ बच्चन की फिल्में, संगीत में रफी दा पसंद हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश के डीजीपी रहे डीपी खन्ना की बेटी नीलम से शादी की। उनकी दोनों बेटियां वर्तमान में यूएस में हैं।
फूफा रहे बुंदेलखंड विवि के पहले रजिस्ट्रार
ऋषि शुक्ला के फूफा प्रकाश शरण अवस्थी उस वक्त गोरखपुर विवि में इंग्लिश के रीडर थे। बाद में बुंदेलखंड विवि के पहले रजिस्ट्रार और काशी विद्यापीठ के भी रजिस्ट्रार रहे। बुआ सुशीला बताती हैं कि ऋषि ने कभी कोचिंग नहीं ली। घर पर ही पढ़े। आइआइटी लाइब्रेरी की किताबों से गाइडेंस लिया और आइपीएस बन गए।
हनक नहीं दिखाई, उदार रहे ऋषि
आइपीएस होने के बाद भी ऋषि ने कभी किसी पर हनक नहीं दिखाई। सदैव दूसरों के प्रति उदार रहे। ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन भी किया। एक बार किसी को थप्पड़ मार दिया था तो अफसोस कर रहे थे। चिट्ठी में भी दर्द बयां किया था। पहली बार वर्दी पहनी तो साथ ग्वालियर की सड़कों पर पैदल घूमे।
कालेज के लिए गौरवान्वित होने का समय
वीएसएसडी कालेज की प्राचार्या डा. छाया जैन ने कहा कि यह गौरवान्वित होने का वक्त है। एक पूर्व छात्र छत्तीसगढ़ के डीजीपी बने तो एक सीबीआइ में निदेशक। हम जल्द ही एलुमिनाई मीट करने वाले हैं। जिसमें हम ऋषि कुमार शुक्ल को बुलाएंगे। उनके साथ ही कई और पूर्व छात्र भी शिरकत करेंगे।  

Posted By: Abhishek