मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जागरण संवाददाता, कानपुर : पहले नीरव मोदी और फिर मेहुल चौकसी, लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) और लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) के जरिए बैंकों को अरबों का चूना लगाने का असर शहर के कारोबार पर पड़ा है। बीते करीब एक माह में विभिन्न बैंकों से जारी होने वाली लेटर आफ क्रेडिट और लेटर और अंडरटेकिंग की कीमत सौ करोड़ रुपये से भी कम रही है जबकि इसके पहले प्रतिमाह औसतन 400 करोड़ रुपये से अधिक के एलसी और एलओयू इश्यू होते थे। कानपुर में सबसे अधिक एलसी और एलओयू भारतीय स्टेट बैंक जारी करता है। बैंक अधिकारियों के अनुसार एसबीआइ वर्ष भर में करीब 1000 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया करीब 800 करोड़, पंजाब नेशनल बैंक करीब 700 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा करीब 500 करोड़, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया करीब 400 करोड़ रुपये के एलसी और एलओयू जारी करता रहा है। इसके अलावा यूको बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, इलाहाबाद बैंक, सेंट्रल बैंक आफ इंडिया भी एलसी और एलओयू जारी करते हैं।

एलओयू या एलसी के लिए सौ फीसद सिक्योरिटी जरूरी है हालांकि कई मामलों में बैंक साख के आधार पर सिक्योरिटी से अधिक क्रेडिट दे देते हैं। पिछले कई मामलों में बैंकों का एनपीए बढ़ने के मामले में यही हुआ है। 50 करोड़ से अधिक एनपीए वाले खातों की जानकारी सरकार के मंगाने के बाद अब बैंकों ने एलसी जारी करने के नियम मौखिक रूप से कड़े कर दिए हैं। जो एलसी पहले एक घंटे में जारी होती थी, वही एलसी जारी होने में अब पांच-पांच दिन का समय लग रहा है।

एलओयू : बैंक अपने कारपोरेट खाताधारक के भुगतान की जिम्मेदारी लेते हुए विदेश स्थित बैंक के लिए लेटर आफ अंडरटेकिंग जारी करते हैं। खाताधारक के भुगतान न करने पर पैसे अदा करने की जिम्मेदारी बैंक की है।

एलसी : खाताधारक की बैंक शाखा साख के आधार पर विक्रेता कंपनियों के बैंक शाखा को भुगतान की गारंटी के लिए जारी करता है।

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ब्याज के खेल से हुए हुआ क्रेडिट फेल

नीरव मोदी और मेहुल चौकसी हों या कोई अन्य आयातक, भारतीय रिजर्व बैंक ने 28 मार्च 2014 को जारी सरकुलर नंबर 115 के जरिए सुविधा दी थी कि ऑथराइज्ड डीलर बैंक लेटर आफ क्रेडिट के जरिए मिली राशि को अपने तय समय के लिए अपने ब्याज प्राप्त होने वाले खाते में रख सकता है। एक से डेढ़ फीसद ब्याज पर मिलने वाले इन ऋणों की एफडीआर कराई गई और उससे ब्याज कमाया गया। पिछले एक महीने में खुले मामलों में इसका भी खुलासा हुआ है।

इस बारे में काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के चेयरमैन मुख्तारुल अमीन का कहना है कि रिजर्व बैंक द्वारा एलओयू पर रोक लगाए जाने से बड़ी-बड़ी कंपनियों की फंडिंग पर असर पड़ेगा। कार्यशील पूंजी पर असर पड़ने से उनके कारोबार भी प्रभावित होंगे। इस संबंध में देखा जाएगा कि क्या रास्ते हो सकते हैं।

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12000 करोड़ से अधिक निर्यात

- 10000 करोड़ का कुल आयात

- 4000 करोड़ से अधिक औद्योगिक कच्चे माल का आयात

- 5000 करोड़ की जारी होती है एलओयू, एलसी

- 100 से अधिक एलसी और एलओयू जारी होती हैं औसतन एक माह में

- 35 से अधिक ओवरसीज बैंक शाखाएं

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प्रभावित कारोबार

चर्म कारोबार, टेक्सटाइल, केमिकल, बुलियन एंड जेम्स, इंजीनिय¨रग, दाल, सूखा मेवा, पाम ऑयल

Posted By: Jagran

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