लखनऊ (जेएनएन)। झांसी के राजकीय महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज में बस दुर्घटना के घायल व्यक्ति का कटा पैर उसी के सिर के नीचे तकिये की तरह रखे जाने को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नोटिस जारी कर मुख्य सचिव से चार हफ्ते में विस्तृत जवाब मांगा है। प्रदेश के मानवाधिकार आयोग ने भी इसे मानव अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा से दो हफ्ते में अपनी आख्या देने को कहा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव के जरिये प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करने के साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव से इस बाबत रिपोर्ट मांगी है कि इस तरह के मामलों के लिए देश भर में डॉक्टरों व अस्पतालों को क्या कोई निर्देश या गाइडलाइंस जारी हुई हैैं या नहीं और निर्देशों पर अमल पता करने के लिए कोई तंत्र बनाया गया या नहीं। आयोग ने निष्पक्ष व दोषियों पर कार्रवाई के साथ ही बायो मेडिकल वेस्ट व कटे अंगों के नियमित निस्तारण के लिए निर्देश जारी किए जाने की भी जरूरत बताई, ताकि भविष्य में फिर ऐसी घटना को होने से रोका जा सके।

घटना की मीडिया रिपोट्र्स के हवाले से आयोग ने इसे अनैतिक व मेडिकल नेग्लीजेंस के साथ घायल के सम्मान व मानवाधिकार का हनन माना है। आयोग ने घायल के कटे पैर के साथ हुए व्यवहार को समझ से बाहर ठहराते हुए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा 28 मार्च, 2016 को जारी बायो मेडिकल वेस्ट (मैनेजमेंट एंड हैैंडलिंग) रूल्स-2016 के हवाले से बताया है कि कटे पैर को ऐसे अंगों के लिए निर्धारित 'यलो बॉक्स में निस्तारित किया जाना चाहिए। यदि मेडिको लीगल केस हो तब भी इस अंग को तुरंत लैब में रखा जाना चाहिए था। कटे अंग से मरीज या अन्य लोगों को संक्रमण भी हो सकता था।

आयोग ने मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य के हवाले से बताया कि घायल को तुरंत उपचार मुहैया कराने के बाद डॉक्टर जब उसका सिर ऊंचा रखने के लिए कुछ तलाश रहे थे कि घायल के परिवारीजन ने ही इसके लिए उसी का कटा पैर सिर के नीचे रख दिया। दूसरी तरफ उप्र मानवाधिकार आयोग ने भी इसे व्यथित करने वाली घटना ठहराते हुए प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा से रिपोर्ट तलब की है।

स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया निलंबन आदेश

झांसी मेडिकल कॉलेज में लापरवाही पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने दो डॉक्टरों व दो नर्सों को निलंबित करने के साथ कंसल्टेंट ऑन कॉल डॉक्टर को चार्जशीट जारी करने की जानकारी दी थी। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग ने इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर डॉ.महेंद्र पाल सिंह तथा दोनों नर्सों दीपा नारंग व शशि श्रीवास्तव के निलंबन का आदेश जारी कर दिया। चिकित्सा शिक्षा अधिकारियों ने बताया कि प्रमुख सचिव द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रिपोर्ट सौंप दी गई है। जांच के लिए विभाग द्वारा पूर्व प्राचार्य डॉ.नरेंद्र सेंगर की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।  

Posted By: Ashish Mishra