उन्नाव, [अनिल अवस्थी]। दस मई यानि आज मदर्स-डे है, सभी अपनी मां को याद कर उनके त्याग के आगे सिर झुका रहे हैं। इन सबके बीच कुछ मां ऐसी भी हैं, जो देश के लिए कोरोना फाइटर्स के रूप में अपने कर्त्वयों का बखूबी निर्वहन कर रही हैं। ऐसे कोराना फाइटर्स के जज़्बे को सलाम करने की जरूरत है, इन्हीं में से उन्नाव के कोविड यूनिट में तैनात स्टाफ नर्स माया भी हैं, जो देश के प्रति अपना फर्ज अदा करने के लिए एक माह से मासूम बेटे से दूर हैं। वह रोजाना गेट पर आकर दूर खड़े तीन साल के मासूम बेटे पर इशारों में प्यार लुटाती हैं और फिर नम आंखों के साथ फिर अपना फ़र्ज अदा करने लौट जाती है।

कोरोना फाइटर्स में देश सेवा का गजब जज्बा है, अपनी जान को जोखिम में डालने के साथ खुशियां भी कुर्बान कर रहे हैं। जब लोग कोरोना वायरस से बचने के लिए लॉकडाउन का पालन करके घरों पर हैं, तब डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ जान जोखिम में डालकर मरीजों की जान बचाने में जुटा है। इनमें बहुत सी मां भी हैं, जो मदर्स डे पर अपने बच्चों से दूर देश के लिए फर्ज अदा कर रही हैं। ऐसी ही स्टॉफ नर्स माया थॉमस हैं, जो जिला अस्पताल की कोविड आइसोलेशन यूनिट में ड्यूटी कर रही हैं।

मासूम बेटे को एक माह से गले नहीं लगाया

स्टाफ नर्स माया थाॅमस कलेजे के टुकड़े तीन वर्ष के बेटे को कभी अपने से दूर नहीं करती थी लेकिन बीते एक माह से वह उन्होंने अपने बेटे को गले तक नहीं लगाया है। उनका यह त्याग देश के प्रति सेवा और अास्था को उजागर करता है। वह एक माह से जिला अस्पताल कोविड आइसोलेशन यूनिट में रह रही हैं। मूलत: केरल की रहने वाली माया थॉमस स्वास्थ्य विभाग में 1996 में सेवा में आई थी। उन्नाव में पहली पोस्टिंग के बाद से अस्पताल कैंपस के सरकारी आवास में पति जीवन थामस और तीन वर्षीय बेटे जेरोन के साथ रहती हैं।

बेटे की याद आती तो कर लेतीं वीडियो कॉल

माया थॉमस को जब बेटे की बहुत याद सताती है तो वह वीडियो कॉल पर उसे दुलारकर मन को तसल्ली दे लेती हैं। वहीं दूसरी तरफ तीन साल का जेरोन अभी मासूम है और मां के पास जाने के लिए वह रोता और जिद करता है। ऐसी स्थिति में घर पर रहकर उसकी देखभाल करने वाले पिता जीवन थामस असहज हो जाते हैं। आखिर वह उसे बाइक से लेकर कोविड यूनिट के गेट पर पहुंच जाते हैं। गेट पर माया थाॅमस आ जाती हैं और दूर से बेटे को देखकर इशारों में दुलारते हुए प्यार लुटाती हैं। वह पास आने का प्रयास करता है तो दिल को कठोर करके माया उसे रोक देती हैं। रोजाना एक बार ऐसा नजारा आसपास देखने वालों को भी भावुक कर देता है।

रोगी सेवा के आगे खुद की खुशी नहीं रखती मायने

माया थॉमस से पूछा कि इतना छोटा बच्चा है और वह उनके बिना कैसे रहता है तो उनकी आंखें डबडबा गई गला रुंध गया। स्वयं के जज्बातों पर काबू करते हुए भर्रायी अावाज में बताया कि नर्सिंग की सेवा में आने के समय रोगी सेवा का संकल्प लिया था। यह वक्त परीक्षा का है, इस समय देश को हमारी जरूरत है। उनका कहना था कि ममता से फर्ज बड़ा है, किसी की जान बचा सकूं इससे बड़ी और कोई खुशी नहीं।

Posted By: Abhishek Agnihotri

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