बांदा, जेएनएन। वरीक्षा कार्यक्रम से हंसी खुशी कार से लौट रहे एक छोटे से परिवार की एक हादसे में जान चली गई। सड़क पर पुआल भरे खड़े ट्रैक्टर-ट्राली में पीछे से कार टकराने पर प्रधानाचार्य मां व रिटायर्ड सीआरपीएफ हवलदार पिता व इकलौते बेटे की मौत हो गई। दुर्घटना की जानकारी पर परिजनों में कोहराम मच गया।

बांदा के मोहल्ला डीएम कॉलोनी निवासी सीआरपीएफ के 55 वर्षीय रिटायर्ड हवलदार दयाराम, 50 वर्षीय प्रधानाचार्य पत्नी कमलेश व इकलौते 25 वर्षीय पुत्र आशुतोष के साथ कार से भाई धरमा के बेटे की वरीक्षा कार्यक्रम में शामिल होने गांव शिवबालक का पुरवा कलेक्टरपुरवा नरैनी गए थे। रविवार रात तीनों कार से घर लौट रहे थे। गिरवां थाना क्षेत्र के ग्राम देवरार व कच्ची सड़क के बीच टायर पंचर होने से खड़े पुआल भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली के पीछे कार भिड़ गई। जोरदार टक्कर से कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

राहगीरों की सूचना पर गिरवां थाने की पुलिस ने कार से घायलों को बाहर निकाला और मेडिकल कॉलेज भेजा। चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना पर परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। परिजनों ने बताया कि दयाराम का छोटा परिवार था। वह पत्नी और इकलौते बेटे के साथ ही रहते थे। उनकी दो पुत्रियां हैं, हादसे में तीनों की मौत से कोहराम मच गया।

पीसीएस की तैयारी कर रहा था अशुतोष

परिजनों ने बताया कि आशुतोष उनका इकलौता बेटा था। मां शिक्षा विभाग में सर्विस कर रही थी तो पिता भी सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त हवलदार थे। पूरा परिवार पढ़ा लिखा व अच्छी छवि वाला था। इसी वजह से उनका इकलौता बेटा अशुतोष भी होनहार था। इलाहाबाद में रहकर वह पीसीएस की तैयारी कर रहा था। कुछ समय पहले उसने दरोगा की भर्ती की भी परीक्षा दी थी। बड़ी बहन पूजा व आरती भी भाई की तैयारी करने से खुश थीं। पर उन्हें क्या पता था कि अचानक हुए हादसे में एक साथ उसकी व माता-पिता की मौत हो जाएगी। 

पुलिस की निष्क्रियता से हुआ हादसा 

पुआल भरे जिस ट्रैक्टर से हादसा हुआ है। पुलिस उसका पहिया पंचर होने की बात कह रही है। जिसके चलते वह हादसे के समय रोड में खड़ा था। समय रहते यदि पुलिस ट्रैक्टर को रोड से हटवा देती तो शायद इतना बड़ा हादसा होने से बच जाता। हादसे के बाद पुलिस दोनों वाहनों को हटवाने के लिए चेतती नजर आई। 

खुशियां पल भर में बिखरीं

दयाराम पत्नी व बेटे के साथ भतीजे की वरीक्षा के कार्यक्रम से घर लौट रहे थे। वरीक्षा को लेकर भाई धरमा के घर रिश्तेदारों की भीड़ थी। सभी रिश्तेदार व परिवार कार्यक्रम को लेकर खुश थे। जैसे ही हादसे की सूचना पहुंची तो सभी लोग बेहाल हो गए और मेडिकल कॉलेज के लिए दौड़ पड़े।

Posted By: Abhishek

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