जागरण संवाददाता, कानपुर : बर्रा पांच स्थित बाजार में प्रोफेसर की पत्नी का मोबाइल लूटने वाले नाबालिग ने पुलिस पूछताछ में झारखंड से आकर शहर में लूट और चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। उसकी निशानदेही पर क्राइम ब्रांच ने दो लुटेरों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो अन्य सदस्य पुलिस को चकमा देकर भाग निकले। लुटेरों के पास से 102 मोबाइल बरामद हुए। गुरुवार को पुलिस ने उन्हें जेल भेजा दिया।

बर्रा छह निवासी डा. आरके मिश्रा जम्मू के कटरा स्थित एसएमवीडी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। यहां उनकी पत्नी अपर्णा मिश्रा बच्चों संग रहती हैं। मंगलवार रात में अपर्णा घर के पास बाजार गई थीं, जहां 13 वर्षीय नाबालिग ने छीन लिया। भागने के दौरान लोगों ने उसे दबोच कर पुलिस को सौंप दिया था। पुलिस पूछताछ में नाबालिग ने बताया कि वह झारखंड में साहिबगंज जिले के थाना तीन पहाड़ बाबूपुर गांव का रहने वाला है। वह गांव के ही रिश्तेदार गौतम कुमार महतो और साहिबगंज में तालझाड़ी करनपुर गांव निवासी मो. रेहान उर्फ राहुल सहित पांच लोग करीब एक साल पहले शहर आया था। सभी लोग शास्त्री नगर के एक मकान में किराए पर रहते थे और लोग बाजारों व सब्जीमंडियों में लोगों के मोबाइल चोरी और लूटपाट करते थे। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने नाबालिग की निशानदेही पर बुधवार देर रात रेहान और गौतम को बर्रा सात स्थित कब्रिस्तान के पास से दबोच लिया, लेकिन उनके दो साथी भाग निकले। उनके पास से एक बैग में चोरी और लूटे हुए करीब तीन लाख की कीमत के 102 मोबाइल बरामद हुए। पुलिस ने तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर शुक्रवार को जेल भेजा।

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नेपाल और बांग्लादेश में बेचते थे मोबाइल

एडीसीपी क्राइम मनीष सोनकर ने बताया कि पकड़े गए लुटेरे झारखंड से आकर लूटपाट करते थे और जब ज्यादा संख्या में मोबाइल हो जाते थे तो इनके गिरोह के ही कुछ सदस्य उसे अपने गांव ले जाते थे। जहां अन्य सदस्य बांगलादेश और नेपाल में बेच देते थे। वहां ये मोबाइल ट्रैक नहीं हो पाते थे। गिरोह का पर्दाफाश करने वाली टीम को डीसीपी साउथ की तरफ से 15 हजार का पुरस्कार की घोषणा की गई है।

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नाबालिग को ट्रेंड कर गिरोह में करते हैं शामिल

एसीपी गोविदनगर विकास पांडेय ने बताया कि गिरोह के मुख्य सदस्य रेहान और गौतम हैं। दोनों नाबालिगों को चोरी और लूटपाट करने के लिए ट्रेंड करते थे और गिरोह में शामिल करते थे। क्योंकि इनके पकड़े जाने पर ज्यादातर लोग उन्हें डांट-डपटकर छोड़ देते थे। इससे इनका गिरोह सुरक्षित रहता था।

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वेरीफिकेशन के बिना ही दे दिया कमरा

थाना प्रभारी दीनानाथ मिश्रा ने बताया कि लोग बिना पुलिस वेरीफिकेशन के ही मकान किराए पर दे देते हैं। लुटेरों के मामले में भी ऐसा ही हुआ होगा। इसकी जांच कराई जा रही है।

Edited By: Jagran