जासं, कानपुर : बीआइसी की जमीनों की चल रही सीबीआइ जांच की वजह से मेट्रो का अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट अटक गया है। दो वर्ष से मेट्रो, बीआइसी से जमीन मांग रहा है ताकि उसे जहां से ट्रेन को जमीन के नीचे ले जाना है वहां काम शुरू कराया जा सके। इसी चक्कर में चुन्नीगंज स्टेशन भी अटक गया है, जिसे बीएनएसडी इंटर कालेज के सामने बनना है और यहां भी बीआइसी की जमीन का कुछ हिस्सा उसे चाहिए।

आइआइटी से नौबस्ता तक जाने वाली मेट्रो में आइआइटी से मोतीझील के बीच का प्राथमिक कारिडोर बन चुका है। अब यही रास्ता चुन्नीगंज स्टेशन से आगे बढ़ते हुए नौबस्ता तक जाएगा। मोतीझील के आगे बढ़ते हुए मेट्रो बृजेंद्र स्वरूप पार्क, उसके पीछे बस्ती, फिर सीसामऊ नाला के ऊपर से गुजरते हुए बीआइसी की जमीन तक पहुंचेगी और फिर वहां जमीन में यह जाएगी। मेट्रो ने यह जमीन इसलिए पसंद की थी कि यहां दोनों टनल बोरिग मशीन (टीबीएम) के उपकरणों को जोड़कर आसानी से जमीन के अंदर भेजे जा सकते थे, लेकिन अब तक जमीन नहीं मिली। इसीलिए मेट्रो चुन्नीगंज की जगह बड़ा चौराहा से टीबीएम को जमीन में भेजेगा। मेट्रो एमडी इस जमीन को लेकर कह रहे हैं कि जल्द मामला हल हो जाएगा, पर वास्तविकता ये है कि बीआइसी बंगलों की चल रही जांच की वजह से बीआइसी यह जमीन नहीं दे रहा है। बृजेंद्र स्वरूप पार्क तक पहुंच कर मेट्रो का रूट अटक गया है। अब जब तक यह जमीन नहीं मिलेगी तब तक मेट्रो का कार्य आगे नहीं बढ़ेगा। इतना ही नहीं चुन्नीगंज से नयागंज तक चार स्टेशन हैं, इनमें से नवीन मार्केट, बड़ा चौराहा के बाद नयागंज स्टेशन का काम भी शुरू हो गया है, लेकिन पहला स्टेशन चुन्नीगंज है वहां बीआइसी की जमीन पर काम नहीं शुरू हो सका है। मेट्रो अफसर मौखिक रूप से यह भी कह चुके हैं कि जो जमीन सीबीआइ की जांच में न आ रही हो, वह जमीन दे दें तो भी काम चल जाएगा, लेकिन इस आग्रह को भी नहीं माना जा रहा।

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