कानपुर, जेएनएन । देश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए अब छात्र-छात्राओं के पास अधिक संभावनाएं होंगी। शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालय साल में दो बार नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट(नीट) कराने पर विचार कर रहा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के सुझाव पर दोनों मंत्रालय 25 जनवरी को इस संबंध में बैठक करके निर्णय लेंगे। शहर से करीब दस हजार छात्र छात्राएं प्रतिवर्ष नीट में शामिल होते हैं।

कोरोना काल में पिछले वर्ष नीट की परीक्षा तीन महीने देरी से हुई थी। मई में होने वाली परीक्षा अगस्त में हुई थी। कई छात्र इस प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन करने से वंचित रह गए थे। छात्रों की मांग है कि साल में दो बार परीक्षा कराई जाए जिससे छूटे हुए छात्र छात्राओं को दूसरे चरण में मौका मिल सके। इस बात को ध्यान में रखते हुए एनटीए ने उच्च शिक्षा व स्वास्थ्य मंत्रालय को सुझाव दिया है कि दो बार प्रवेश परीक्षा हो सकती है। इसके लिए रणनीति बनाए जाने की जा सकती है। मेडिकल की तैयारी कराने वाले वरिष्ठ शिक्षक डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि दो बार प्रवेश परीक्षा के अलावा ऑनलाइन परीक्षा कराए जाने की योजना भी बनाई जा रही है। ज्यादातर छात्र ऑनलाइन परीक्षा कराए जाने के पक्ष में हैं जबकि कुछ छात्रों ने इंटरनेट कनेक्टिविटी व ग्रामीण क्षेत्र में रहने के कारण ऑफलाइन परीक्षा को बरकरार रखने की मांग की है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के चलते स्कूल से कॉलेजों तक ऑनलाइन कक्षाएं लगाकर पढ़ाई कराई गई है, इसलिए इस प्रणाली के साथ परीक्षा आयोजित कराई जा सकती हैं। नीट के फॉर्म जल्द जारी होने की संभावना है।

70 फीसद कोर्स घटाकर भी पूरा पेपर कर सकेंगे हल

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सीबीएसई के 11वीं व 12वीं का पाठ्यक्रम 30 फीसद कम करने का असर नीट में नहीं पड़ेगा। मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि जिस प्रकार पहले 180 अंकों का प्रश्न पत्र आता था उसी तरह इस बार भी प्रश्न पत्र आएगा। सीबीएसई के तैयार किए गए 70 फीसद पाठ्यक्रम से 45 अंकों के भौतिकी, 45 अंकों के रसायन व 90 अंकों के प्रश्न जीव विज्ञान से पूछे जाएंगे। इसके अलावा जिन छात्रों ने पूरे पाठ्यक्रम से पढ़ाई की है, वे भी प्रश्न पत्र हल कर सकेंगे। विशेषज्ञों की राय है कि छात्रों को चाहिए कि 70 फीसद पाठ्यक्रम को कंठस्थ कर लें। अगर कुछ कमी रह जाती है तो बचे हुए 30 फीसद पाठ्यक्रम से महत्वपूर्ण प्रश्नों को तैयार कर लें। इस नए फॉर्मेट का लाभ अधिक छात्रों को मिलेगा।

देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या

-272 सरकारी मेडिकल कॉलेज : 41388 सीटें

-260 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज : 35540 सीटें

-उत्तर प्रदेश में 12 मेडिकल कॉलेज : 1449 सीटें  

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