कानपुर, जेएनएन। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) में सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल कॉलेज नहीं बल्कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नए शोध एवं अध्ययन के लिए मेडिकल इंजीनियङ्क्षरग रिसर्च इंस्टीट्यूट बनेगा। यहां इलाज की नई तकनीक, डायग्नोस्टिक मशीनें और सर्जिकल उपकरण पर काम होगा ताकि मरीजों के बेहतर इलाज एवं देखभाल में मदद मिल सके। साथ ही सुपर स्पेशियलिटी विशेषज्ञों को फेलोशिप कोर्स कराया जाएगा। शुक्रवार को आइआइटी कानपुर में हुई बैठक में विचार-विमर्श के बाद चार सदस्यीय टीम ने यह निर्णय लिया। इससे पहले यहां मेडिकल कॉलेज खोले जाने पर बात हो रही थी।

चार सदस्यीय टीम में शामिल जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य प्रो. आरती लालचंदानी ने बताया कि बैठक में आइआइटी के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर, आइआइटी बायो साइंसेज के विभागाध्यक्ष प्रो. गणेश एवं लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) के निदेशक प्रो. विनय कृष्ण शामिल हुए। आइआइटी निदेशक ने स्पष्ट किया कि यहां एमबीबीएस और एमडी/एमएस की पढ़ाई के लिए इंस्टीट्यूट नहीं बनाना है।

देश में ऐसे तमाम कॉलेज एवं इंस्टीट्यूट हैं। हम एक कदम आगे बढ़कर विश्वस्तरीय उत्कृष्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट बनाएंगे, जहां मेडिकल और इंजीनियङ्क्षरग की जुगलबंदी से मरीजों के इलाज एवं देखभाल के लिए आधुनिक उपकरण, टेक्नोलॉजी तैयार हो सकें। इंस्टीट्यूट का प्रारूप तय करने के लिए घंटों मंथन भी किया गया।

बजट की कमी नहीं

प्रो. आरती लालचंदानी के मुताबिक आइआइटी निदेशक अभय करंदीकर ने आश्वासन दिया है कि इंस्टीट्यूट की स्थापना में बजट की कमी आड़े नहीं आएगी। अमेरिका में रह रहे यहां के पूर्व छात्र ने एक मिलियन डॉलर देने पर सहमति जताई है। इसके अलावा मुंबई में टाटा संस के रतन टाटा ने भी हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

परिसर में 20 एकड़ भूमि उपलब्ध

आइआइटी परिसर में 20 एकड़ भूमि भी उपलब्ध है। जहां इंस्टीट्यूट के लिए अत्याधुनिक बिल्डिंग का निर्माण हो सकता है।

डॉ. हर्षवर्धन से लिया समय

प्रो. आरती के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से भी समय मांगा गया है। इंस्टीट्यूट के प्रारूप एवं उसकी स्थापना को लेकर निदेशक समेत टीम के सभी सदस्य उनसे मुलाकात कर हर पहलू पर बात करेंगे।

Posted By: Abhishek

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