कानपुर, जेएनएन ।

जाम से झल्लाहट है और गंदगी पर गुस्सा। त्योरियां बार-बार टूटती सड़कों को देखकर चढ़ती हैं। खराब शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं देखकर गुस्सा आता है। निश्चित तौर पर कानपुर में यह सभी समस्याएं हैं, लेकिन इनमें से कोई भी समस्या नई नहीं है। वर्षों हो गए, समस्याएं जस की तस हैं और सरकार व सरकारी विभागों को कोसने का सिलसिला भी बदस्तूर जारी है।

ऐसे में अब सवाल उठना लाजिमी है कि क्या गुस्सा होते रहने या कोसने भर से कुछ हासिल होगा? यकीनन नहीं। तब क्या किया जाए? समस्याओं के जिक्र के साथ समाधान पर मंथन करने के लिए 'जागरण’ ने शनिवार को 'माय सिटी माय प्राइड’ अभियान के तहत राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित की। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शहर के प्रबुद्धजनों ने इस पर विचार-विमर्श किया। जोर इस बात पर था कि हम समस्या के साथ वह समाधान भी सुझाएं जो कुछ बदलाव ला सकते हैं।

 

फिर जाम की समस्या हो या गंदगी की, सभी पर एकराय यही थी कि सिर्फ सरकार के भरोसे न बैठें। सरकार को तो अपना काम करना ही चाहिए, जनता भी अपनी भागीदारी निभाए। मूल मंत्र यही कि सभी के प्रयासों से ही शहर की सूरत बदलेगी। कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन संपादकीय प्रभारी आनंद शर्मा ने किया। अतिथियों का स्वागत यूनिट हेड अवधेश शर्मा और संचालन आरजे अखिल ने किया। 

खाली भूमि का कार पार्किंग में इस्तेमाल

व्यापारी नेता श्रीकांत शुक्ला का सुझाव था कि व्यापारी थोड़ी सी समझदारी दिखाएं तो उन्हीं का लाभ है। यदि बाजार में जाम नहीं लगेगा तो उनका व्यापार ज्यादा चलेगा। बाजारों में पार्किंग व्यवस्था बेहतर हो। साथ ही नगर निगम बृजेंद्र स्वरूप पार्क के कुछ भाग का इस्तेमाल आर्यनगर बाजार की पार्किंग के लिए कर सकता है।

सड़क टूटते ही होना चाहिए पैचवर्क
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुरेंद्र सनेजा का कहना था कि खराब सड़कें शहर की सूरत बहुत बिगाड़ती हैं। किसी सड़क पर छोटा सा भी गड्ढा हो तो उस पर तुरंत पैचवर्क होना चाहिए। वहीं, नगर निगम हर क्षेत्र में पर्याप्त कूड़ादान रखे और लोगों को जागरूक करे कि कूड़ा इन्हीं में डाला जाए।

सिर्फ सरकार के भरोसे न बैठें
कर्मचारी नेता राजेश शुक्ल का कहना था कि सूरत की हालत कानपुर से भी खराब थी। वहां प्लेग फैला तो जनता खुद भी जागरूक हुई और स्थितियां सुधर गईं। सूरत शहर की सूरत ही बदल गई। हमें सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं बैठना चाहिए, बल्कि व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए जनता भी जागरूक हो।

सहनशीलता और विनम्रता के साथ चलें सड़क पर
डॉ. आरएन चौरसिया ने कहा कि हम घर तो साफ रखते हैं, लेकिन बाहर निकलकर दूसरों जैसा व्यवहार करने लगते हैं। हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभाए। सड़क पर सहनशीलता और विनम्रता के साथ चलें। बेवजह की प्रतिस्पर्धा से ही अव्यवस्था फैलती है और जाम लगता है।

बड़े विजन के साथ बनें योजनाएं
रोटरी क्लब के मंडलाध्यक्ष (2020-21) डीसी शुक्ला का सुझाव था कि विकास योजनाएं बड़े विजन के साथ बननी चाहिए। सोचें कि बीस साल बाद यह योजना कितनी कारगर होगी। बाजार और स्कूल खुलने के समय में अंतराल रखें तो सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा।

शासन की सख्ती से आएगा अनुशासन
कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट इम्प्लाइज एंड वर्कर्स कानपुर के महासचिव शरद प्रकाश अग्रवाल ने अतिक्रमण को बड़ी समस्या बताया। उनका कहना था कि शासन की सख्ती से ही अनुशासन चलता है। साथ में नागरिकों को अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

स्कूल और अस्पताल करें पार्किंग की व्यवस्था
रोटरी क्लब के पूर्व मंडलाध्यक्ष विनय कुमार अस्थाना का कहना था कि स्कूलों की वजह से मरियमपुर चौराहे वाली रोड पर बहुत जाम लगता है। स्कूलों और अस्पतालों को निर्माण के साथ ही पार्किंग की व्यवस्था कर लेनी चाहिए। वहीं, प्रशासन इन पर नजर रखे।

सड़क की गुणवत्ता के लिए भी चले मुहिम
रोटरी क्लब ऑफ कानपुर शिखर के पूर्व अध्यक्ष सुशील चंद श्रीवास्तव बोले कि सड़कों की खराब गुणवत्ता भी विकास से जुड़ा अहम मसला है। जनता को मिलकर एक मुहिम सड़कों की गुणवत्ता के लिए चलानी चाहिए। हमें अपने घर और क्षेत्र से सुधार की शुरुआत करनी होगी।

त्योहारों की भी होनी चाहिए ब्रांडिंग
उद्योगपति नरेंद्र शर्मा बोले कि किसी भी देश, प्रदेश या शहर का विकास करना है तो वहां के आहार, व्यवहार, त्योहार और दरबार पर फोकस करना चाहिए। गुजरात, राजस्थान की तरह कानपुर यदि अपने त्योहारों की ही ब्रांडिंग कर ले तो बहुत पहचान मिल सकती है।

सड़क बने तो जनता करे निगरानी
सज्जादानशीं अबुल बरकात नजमी का कहना था कि कानून सख्त होने से कुछ नहीं होगा, पहले रिश्वत बंद हो। इसके अलावा जब भी सड़क बने तो क्षेत्र की जनता खुद निगरानी को खड़ी हो जाए। वहीं, अतिक्रमण के लिए स्थानीय पुलिस की जिम्मेदारी तय कर दी जानी चाहिए।

वार्डवार समितियां बनाकर लें फीडबैक
लॉयर्स एसोसिएशन के महामंत्री जितेंद्र सिंह तोमर बोले कि अच्छी सड़क, पानी और स्वच्छता ही विकास है। जिला प्रशासन सभी वार्डों में आमजनों की समितियां बना दे। उनसे मिले फीडबैक के आधार पर काम कराए तो बहुत सुधार दिखेगा।

व्यवस्था बने तो उसका पालन भी हो
कानपुर बार एसोसिएशन के महामंत्री भानुप्रताप सिंह ने उदाहरण दिया कि पान-मसाले के सेवन पर रोक लगाकर कचहरी परिसर को स्वच्छ बनाया। इसी तरह कोई भी व्यवस्था बनाकर उसका पालन सुनिश्चित कराया जाए तो समस्याएं सुधरेंगी। निरंकुश वाहनों पर भी रोक लगे।

हम प्रशासन के सहयोग को तैयार
किराना मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश बाजपेयी ने बताया कि नयागंज में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। घंटाघर से चार सड़कें माल रोड तक जाती हैं। उनमें से दो को वनवे किया जा सकता है। प्रशासन कोई भी पहल करे, हम साथ देने को तैयार हैं।

आधारभूत व्यवस्थाओं पर देना होगा ध्यान
व्यापारी लाला त्रिवेदी का कहना था कि स्वच्छता बड़ी समस्या है। फल-सब्जियों के ठेले वालों को व्यवस्थित कर दिया जाए तो शहर से 25 फीसद गंदगी कम हो जाए। शासन-प्रशासन बड़ी योजनाओं के बजाय मूलभूत बातों पर ध्यान दे तो ज्यादा ठीक होगा।

By Krishan Kumar