हमारे शहरों में अच्छे नेत्र चिकित्सालयों को अभाव है जिसके कारण लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। लोगों की इसी समस्या को समझते हुए प्रभु भक्ति में लीन महंत जितेंद्र दास महाराज ने आंखों का अस्पताल मंदिर परिसर में खुलवाया।बचपन से धर्म-आध्यात्म की भावनाएं दिल में बस गई थीं। धुन प्रभु सेवा की थी, लेकिन एक वाकये ने जीवन को नया मकसद, नई धारा दे दी।

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यह पनकी मंदिर के महंत जितेंद्र दास महाराज हैं, जिनकी आस्था ईश्वर के साथ मानव सेवा से भी जुड़ गई है। इस मंदिर में हजारों श्रद्धालु शीश नवाने आते हैं, तो नेत्र रोगी स्वास्थ्य लाभ के लिए भी आते हैं। यहां अस्पताल के रूप में स्वास्थ्य का मंदिर भी चल रहा है।

पनकी मंदिर के महंत जितेंद्र दास महाराज मूल रूप से मथुरा के निवासी हैं। 45 वर्षीय महंत के पूर्वज भरतपुर रियासत के राजगुरु थे। 1976 में उनके पिता कानपुर आए तो उनके साथ यहां आ गए। सन् 2000 से वह पनकी हनुमान मंदिर में प्रभु सेवा कर रहे हैं।

वह बताते हैं कि 2014 में गुरुजी बाबा भुवनेश्वर दास ने शरीर त्यागा, उससे दो माह पहले उनकी आंखों की रोशनी चली गई। इलाज के लिए अस्पताल ले जाते थे। तब उन्होंने ही कहा था कि नेत्र की रोशनी चले जाने पर बहुत परेशानी होती है। ऐसे मरीजों के लिए मंदिर परिसर में ही अस्पताल बनवाना।

 

उसी प्रेरणा से तीन फरवरी 2015 को बाबा भुवनेश्वर दास नेत्र एवं स्वास्थ्य अस्पताल की शुरुआत की। महंत जितेंद्र दास महाराज ने बताया कि वह समय-समय पर मलिन बस्तियों, गरीब बस्तियों में नेत्र परीक्षण शिविर लगाते हैं। वहां मरीजों की जांच कर उनका पंजीयन किया जाता है। उसके बाद जरूरत अनुसार उनका इलाज और ऑपरेशन आदि निशुल्क किया जाता है। अब तक 2730 नेत्र रोगियों के ऑपरेशन किए जा चुके हैं। इसके अलावा रक्तदान शिविर भी लगाते हैं। इसी साल मेडिकल कॉलेज और उर्सला अस्पताल को 114 यूनिट रक्त दान दे चुके हैं।

महंत जितेंद्र दास महाराज ने कहा कि मैं सभी संत-महंतों से कहना चाहता हूं कि संत तो समाज के लिए हैं। वह धार्मिक प्रकाश फैलाने के साथ ही समाज की सेवा भी करें। वही प्रभु की सच्ची सेवा भी होगी। वहीं, जनता को ध्यान रखना चाहिए कि संत के वेश में छल-प्रपंच करने वालों से दूर रहें। ऐसे लोग पूरे संत समाज की छवि खराब करते हैं।

बनाएंगे सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल
बाबा भुवनेश्वर दास नेत्र एवं स्वास्थ्य चिकित्सालय में जुलाई से निशुल्क फिजियोथैरेपी की सेवा भी शुरू हो रही है। महंत जितेंद्र दास बताते हैं कि जब अस्पताल का निर्माण शुरू किया तो धनाभाव की चुनौतियां थीं, लेकिन दानदाताओं ने पूरा सहयोग दिया। मशीनें खरीद कर दीं। अब वह 100 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाना चाहते हैं। इसके लिए चार बीघा भूमि चिन्हित की जा चुकी है।

वह कहते हैं कि दानदाताओं और सरकार का सहयोग मिला तो यहां अस्पताल बनाने का सपना है कि मुंबई और दिल्ली से भी मरीजों को यहां लाया जाए। इस अस्पताल में इलाज निशुल्क या रियायती दरों पर किया जाएगा।

By Nandlal Sharma