आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए सरकारी महकमे काम तो करते हैं, लेकिन बहुत से काम कुछ अलग होते हैं। उन पर भले ही किसी का ध्यान न जाए, लेकिन लोगों को उनकी जरूरत बहुत होती है। जिंदगी की 'सेकंड इनिंग' में कर अधिवक्ता बीएन खन्ना की नजर शहर की ऐसी ही जरूरतों पर पड़ती गई और अपने सेवाभाव से उन्होंने नजारे बदलने भी शुरू कर दिए। फिर चाहे शहर का पहला मोक्षधाम हो या हरियाली से झूमती पार्वती बागला रोड।

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शहर के लिए सहेजी परिवार की धाती
सिविल लाइन्स निवासी 89 वर्षीय बीएन खन्ना बताते हैं कि इस शहर में कोई भी मोक्षधाम नहीं था। दादा लाला देवी प्रसाद खन्ना ने 1895 में भैरव घाट पर अयोध्या मोक्षधाम बनवाया। वहां पत्थर की इमारत बनवाई। इतने सालों में उसका रखरखाव नहीं हुआ तो उसकी स्थिति खराब हो गई।

2010 में तत्कालीन महापौर रवींद्र पाटनी ने कहा कि यह आपके दादाजी द्वारा बनवाया घाट है। इसके लिए कुछ करना चाहिए। तब उसका जीर्णोद्धार शुरू कराया। एक बगीचा बनवाया। उसमें 125 पौधे लगवाए। तीन स्नानागार बनाए। पुराने सूख चुके कुएं तो ट्यूबवेल से भरने की स्थायी व्यवस्था कर ठंडे पानी की मशीन लगवाई। साथ ही मोक्षधाम से लेकर ग्वालटोली चौराहे तक सड़क के दोनों ओर 175 पौधे लगाकर खुद सींचा, संरक्षण किया। उसी वजह से इस सड़क पर घनी हरियाली रहती है।

गरीबों के लिए निशुल्क डिस्पेंसरी 

बीएन खन्ना ने महसूस किया कि गरीबों के लिए निशुल्क चिकित्सा सुविधा भी होनी चाहिए। इसी सोच के साथ चौक टोपी बाजार में होम्योपैथिक डिस्पेंसरी चौक टोपी बाजार में शुरू की। वहां नियमित रूप से चिकित्सक आते हैं। सुबह-शाम मरीजों को मुफ्त दवाएं दी जाती हैं। यही नहीं, यदि उन्हें किसी जांच की जरूरत हो तो पैथोलॉजी भेजकर उसकी जांच का खर्च भी बीएन खन्ना ही वहन करते हैं।

गरीब बेटियों को कर रहे शिक्षित
हर क्षेत्र में सेवाएं देने के संसाधन भले ही विकसित न किए हों, लेकिन सेवा कार्य में बीएन खन्ना पीछे नहीं हैं। बेटियों की शिक्षा को बहुत जरूरी मानने वाले सेवाभावी खन्ना गरीब बेटियों का एडमिशन शहर के अच्छे स्कूलों में कराते हैं और पढ़ाई का पूरा खर्च उठाते हैं। उन्होंने बताया कि जो बेटी मेधावी हो, उसे इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफेशनल कोर्स भी कराते हैं। कई बेटियां सफलता का मुकाम हासिल कर चुकी हैं।

बीएन खन्ना ने अपने लक्ष्य के बारे में कहा कि समाज की सेवा के लिए समाजसेवी का तमगा जरूरी नहीं। जरूरी यह भी नहीं कि आप किसी एक ही क्षेत्र में काम करें। मैं पेशे से कर अधिवक्ता हूं। ताउम्र अपने पेशे में ईमानदारी रखी। मगर, अब चाहता हूं कि समाज के लिए भी कुछ करूं। यह सब अपने मानसिक सुकून के लिए करता हूं। चाहता हूं कि प्रत्येक संपन्न व्यक्ति को समाज के लिए कुछ न कुछ योगदान देना ही चाहिए।

और संसाधन होते तो... 

बीएन खन्ना कहते हैं कि वह अपनी क्षमता अनुसार जो भी बन पड़ रहा है, कर रहे हैं। यदि और संसाधन होते तो शहर के गरीब बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षण संस्थान और एक अस्पताल का निर्माण कराता।

By Krishan Kumar