शिक्षा और स्वास्थ्य को आम आदमी के लिहाज से देखें तो इन दो क्षेत्रों में ही सुधार सबसे जरूरी माना जाता है। निस्संदेह किसी भी सरकार की फिक्र सुधार के प्रति होती है। लगातार हो रहे प्रयासों के बावजूद क्या खामियां हैं? आखिर कैसे सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हो सकती है? क्या सिरे से ढांचागत बदलाव की जरूरत है? इन सवालों का जवाब बतौर स्वास्थ्य विशेषज्ञ पूर्व सीएमओ डॉ. वीसी रस्तोगी दो टूक देते हैं। वह मानते हैं कि सिस्टम तो पर्याप्त है, जरूरत सिर्फ बेहतर प्रबंधन की है।

10 फीसद लोगों में ही सुधार की जरूरत
डॉ. रस्तोगी कहते हैं कि सीएमओ का दायित्व अपने संसाधनों से आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना है। शहरी क्षेत्र में लगभग 55 स्वास्थ्य केंद्र हैं और ग्रामीण क्षेत्र में करीब 50 प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। यह ऐसा ढांचा है, जिससे घर-घर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा सकती हैं। सिर्फ इच्छाशक्ति होनी चाहिए इस सिस्टम के बेहतर संचालन की। डॉ. रस्तोगी मानते हैं कि 90 फीसद लोग सही होते हैं, सिर्फ 10 फीसद लोगों को ही सुधारने की आवश्यकता होती है।

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सीएमओ को मिले मजिस्ट्रेट जैसे अधिकार
डॉ. रस्तोगी को लगता है कि सीएमओ जैसे जिम्मेदारी के पद पर बैठे व्यक्ति के अधिकार कुछ कम हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त मेडिकल स्टॉफ, एएनएम, आशा आदि हैं। फिर भी कभी गर्भवती की निगरानी में लापरवाही होती है। कभी एंबुलेंस नहीं पहुंच पाई, कभी स्टॉफ गायब मिलता है। यदि सीएमओ को मजिस्ट्रेट की तरह अधिकार मिल जाएं तो यह सिस्टम सही चलने लगेगा।

पीएचसी-सीएचसी पर आउटसोर्सिंग से कराएं काम
अपने अनुभव से डॉ. रस्तोगी बताते हैं कि कई बार सीएचसी, पीएचसी पर संसाधनों की कमी रहती है। वहां एक्सरे या अन्य जांच की मशीनें नहीं हैं। तब मरीजों को वापस लौटना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक को आउटसोर्सिंग के जरिए भी ये सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए। यह तरीका वह अपने कार्यकाल में अपना भी चुके हैं।

आइएएस के हाथ में न हो चिकित्सा प्रबंधन
अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती से लेकर दवाओं की थोक खरीद का अधिकार शासन में बैठे आईएएस अधिकारियों के पास ही है। डॉ. रस्तोगी कहते हैं कि दवाओं की खरीद के मामले में सीएमओ से संस्तुति ली जाए कि उन्हें अपने जिले में कौन सी दवाएं चाहिए। फिर दवाओं की खरीद डायरेक्टर जनरल मेडिकल एंड हेल्थ द्वारा की जाए। अभी सारा काम स्वास्थ्य सचिव को सौंप दिया गया है। चूंकि आईएएस इसके विशेषज्ञ नहीं हैं, इसलिए व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं।

डॉक्टर के साथ पूरा हो मेडिकल स्टॉफ
उर्सला हो या डफरिन, यहां चिकित्सकों के साथ मेडिकल स्टॉफ की भी कमी है। डॉ. रस्तोगी का सुझाव है कि सभी अस्पतालों में सिर्फ डॉक्टरों की रिक्तियां पूरी कर देने से काम नहीं चलेगा। यूनिटवार जरूरत के हिसाब से मेडिकल स्टॉफ भी पूरा हो, तभी मरीज की उचित देखभाल संभव है।

- डॉ. वीसी रस्तोगी, पूर्व सीएमओ

By Nandlal Sharma