शिक्षा के सुधार के लिए सरकार योजनाएं भले ही कितनी बना ले, लेकिन जब तक व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होगा, तब तक ये हकीकत की जमीं पर नहीं उतर सकतीं। अपनी कारोबारी की छवि से आगे समाजसेवी के रूप में प्रतिष्ठित हो चुके ओमप्रकाश डालमिया की सोच यही थी। तभी तो गगनचुंबी इमारतें बनाते-बनाते उन्होंने भविष्य निर्माण की ओर भी अपने हाथ बढ़ा दिए। छात्रों को पढ़ाई की मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराते हुए काबिलियत और सफलता के बीच सेवा का सेतु बना चुके हैं।

सिविल लाइंस निवासी 60 वर्षीय ओमप्रकाश डालमिया पेशे से पान मसाला, रियल एस्टेट और होटल कारोबारी हैं। मगर, फर्श से अर्श तक पहुंचे डालमिया आम इंसानों की जरूरत से भी बखूबी बाबस्ता हैं। कारोबार करते-करते वह समाजसेवा से भी जुड़ गए। वर्तमान में रोटरी क्लब ऑफ कानपुर सूर्या के चार्टर प्रेसिडेंट हैं।

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उन्होंने बताया कि एक दिन बीएनएसडी शिक्षा निकेतन के प्रधानाचार्य डॉ. अंगद सिंह और रेडक्रॉस सोसाइटी के सचिव आरके सफ्फड़ चर्चा कर रहे थे कि एक छात्र आइआइटी में चयनित हो गया, लेकिन पढ़ने के लिए पैसा नहीं है। तब सोचा कि गरीब छात्रों की मदद की जाए। उस लड़के की पढ़ाई का खर्च उठाया। उसे विदेश में 29 लाख रुपये के पैकेज पर नौकरी मिली। वह बाद में स्वदेश लौट आया। उसकी सफलता देखने के बाद से सिलसिला चल रहा है कि जो भी जरूरतमंद प्रतिभावान विद्यार्थी सरकारी उच्च शिक्षण संस्थान में दाखिला ले और पैसा न हो तो उसका खर्च वह उठाते हैं।

 

वी-कैन कोचिंग से गरीबों को बना रहे अफसर
ओपी डालमिया ने बताया कि उन्होंने अपने पिता स्व. रघुनाथ प्रसाद डालमिया के नाम से ट्रस्ट बनाया। उसी ट्रस्ट के माध्यम से वह आर्यनगर में वी-कैन नाम से कोचिंग चला रहे हैं। उसमें गरीबों को सिविल सर्विसेज की निशुल्क तैयारी कराई जा रही है। कई छात्र-छात्राएं विभिन्न विभागों में अफसर बन चुके हैं।

चटाई मोहाल में कराया स्कूल का जीर्णोद्धार
चटाई मोहाल में रामदास विद्या मंदिर है। उसकी हालत बहुत खराब हो चुकी थी। वहां पढ़ने आने वाले बच्चों के लिए कोई सुविधा नहीं थी। तब ओपी डालमिया को इसकी जानकारी हुई। करीब तीन साल पहले उन्होंने अपने खर्च से पूरे स्कूल का जीर्णोद्धार करा दिया।

बदले में लेते सेवा का संकल्प
युवाओं की पढ़ाई में मदद करने की एवज में ओपी डालमिया उनसे भी कुछ चाहत जरूर रखते हैं। छात्रों से वादा लेते हैं कि जीवन में जब वे सफल और सक्षम बन जाएंगे तो दूसरे गरीब छात्रों को पढ़ाई में सहयोग करेंगे। हालांकि इसके लिए उन्हें लिखित रूप से बाध्य नहीं करते हैं।

'कर्म करने के लिए इंसान स्वतंत्र है और फल देने के लिए भगवान बाध्य हैं। दूसरे क्या कर रहे हैं और क्या नहीं, यह देखने की जरूरत नहीं है। आप अपने स्तर से समाज के लिए और खुद के मानसिक सुकून के लिए क्या बेहतर कर सकते हैं, इस पर ध्यान देना चाहिए। मैं इसी सोच के साथ काम करता हूं। फिर चाहे वह सेवा कार्य हो या मेरा कारोबार।'
- ओमप्रकाश डालमिया

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By Nandlal Sharma