'हम किसी भी शहर में रहें, जरूरत होती है आधारभूत सुविधाओं की। हर वर्ग को बिजली, पानी की बेहतर आपूर्ति और चलने के लिए अच्छी सड़कों की जरूरत है। जन सुविधाओं के नाम पर सरकारें इन्हीं सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए काम भी करती हैं। बजट का एक हिस्‍सा भी इन पर खर्च होता है। कानपुर में सड़कें गड्ढामुक्त की जा रही हैं।

अपने शहर को शानदार बनाने की मुहिम में शामिल हों, यहां करें क्लिक और रेट करें अपनी सिटी

 

मौजूदा सड़कों का संजाल इतना ठीक इसलिए नहीं माना जा सकता, क्योंकि आबादी का दबाव बहुत बढ़ गया है। शहर में अब फ्लाईओवर बनाए जाने की जरूरत है। सड़कें और चौराहे अतिक्रमणमुक्त हों तो भी राह आसान हो जाए। शहर मे बिजली नेटवर्क को इतना मजबूत किया जा चुका है कि जनता को निर्बाध आपूर्ति की जा सके। वहीं लाइन लॉस कम हो तो बिजली चोरी रुक सकती है। जल संकट जरूर अहम मुद्दा है। सरकार ने संसाधन तो पूरे तैयार कर लिए हैं, जनता को जल संरक्षण की अपनी जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

गंगा लिंक एक्‍सप्रेस बनने से होगा जाम खत्‍म

इस ऐतिहासिक शहर ने आबादी बढऩे के साथ विस्तार तो लिया, लेकिन उस रफ्तार से दबाव को सहने लायक सड़कें नहीं बन सकीं। जाम की समस्या बड़ी है, औसतन हर सड़क लगभग सात मीटर चौड़ी है और प्रत्येक सड़क से दो लाख राहगीर प्रतिदिन गुजरते हैं। इतने आवागमन से जाम लगना लाजिमी है। इसके अलावा जीटी रोड पर स्‍थानीय ट्रैफिक के साथ बाहरी भारी वाहनों का भी बोझ है।

 

इस समस्या को सरकार ने समझा है और सुधार के लिए रूपरेखा बनाई है, लेकिन अब जरूरत उस पर पूरी तरह से अमल की है। मसलन, जीटी रोड पर जितनी भी रेलवे क्रॉसिंग हैं, वहां फ्लाईओवर बना दिए जाएं। वहीं जो आउटर रिंग रोड प्रस्तावित है, उसका निर्माण कर दिया जाए। साथ ही हाल ही में गंगा लिंक एक्सप्रेस वे की रूपरेखा तैयार हुई है। इसे भी स्वीकृत कर जल्द से जल्द बना दिया जाए तो काफी हद तक यातायात सुगम हो जाएगा। चौराहों और फुटपाथ से अतिक्रमण भी हटाने की जरूरत है।

बिजली चोरी के लिए कानपुर में अंडरग्राउंड केबिल की जरूरत

कानुपर की बिजली में काफी सुधार हो चुका है। शहरी क्षेत्र विद्युत वितरण के लिहाज से 20 डिवीजन में बंटा है। इसमें 87 सब स्टेशन और 4815 ट्रांसफारमर से विद्युत आपूर्ति हो रही है। बिजली के क्षेत्र में हुए काम का अंदाजा इन तथ्यों से लगा सकते हैं कि 2017 में सैकड़ों नए ट्रांसफार्मर लगे। सबस्टेशन अपग्रेड हुए।

नए पावर ट्रांसफार्मर भी लगे, जिसका नतीजा हुआ कि अब बिजली नेटवर्क की क्षमता 900 मेगावाट लोड की हो चुकी है। लाइन लॉस कम करने में भी केस्को पूरे प्रदेश में अव्वल रहा है। यहां सबसे कम मात्र 14.5 फीसद लाइन लॉस बचा है, जिसमें बिजली चोरी भी शामिल है। विभागीय अधिकारी मानते हैं कि यदि जनता केबिल अंडरग्राउंड करने में सहयोग करे और बिजली चोरी न करे तो इंतजाम और बेहतर होते जाएंगे।

जलापूर्ति: संसाधनों का इस्तेमाल न कर पाने की नाकामी

जलापूर्ति के इंतजामों को बेहतर करने के लिए किसी भी सरकार ने प्रयासों में कमी नहीं छोड़ी। जनता को पर्याप्त पेयजल मुहैया कराने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया गया। अंग्रेजों के जमाने में भैरोघाट पंपिंग स्टेशन और लोअर गंगा कैनाल से ही जलापूर्ति होती थी, लेकिन वक्त के साथ विभिन्न योजनाओं में गंगा बैराज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, गुजैनी वाटर वर्क्‍स बनाए गए।

करोड़ों रुपये खर्च कर पानी की पाइप लाइन डाली गई, नए ट्यूबवेल और हैंडपंप लगे। इस तरह शहर में 66 करोड़ लीटर जलापूर्ति के संसाधन तैयार किए जा चुके हैं, लेकिन सरकारी तंत्र की नाकामी यही है कि इनका पूरा इस्तेमाल नहीं कर रहा है। भैरोंघाट पंपिंग स्टेशन के अलावा कोई पंपिंग स्टेशन और नलकूप अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल रहे हैं।

जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन के तहत जो पाइप लाइन डाली गई थी, उसकी टेस्टिंग हो रही है तो जगह-जगह लीकेज निकल रहे हैं। स्थिति यह है कि आबादी के हिसाब से प्रतिदिन 70 करोड़ लीटर पानी की जरूरत है। संसाधन 66 करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति के हैं, लेकिन सप्लाई हो पा रही है 42.3 करोड़ लीटर पानी की। जल निगम और जलकल संसाधनों का पूरा इस्तेमाल करने लगें और जनता वर्षा जल संचयन करने लगे तो जल संकट रहेगा ही नहीं।

By Krishan Kumar