कानपुर, जेएनएन। लाला लाजपत राय अस्पताल(हैलट) में रेमडेसिविर प्रकरण में दो नॄसग स्टाफ एवं दो फार्मासिस्ट दोषी पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य को पत्र लिखा है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि यह प्रकरण हमारे कार्यभार संभालने से पहले का है। इसलिए शुक्रवार को बैठक बुलाई है, जिसमें इस प्रकरण से जुड़ी समस्त पत्रावलियों को मंगाया है। उसके आधार पर ही कार्रवाई तय की जाएगी।

प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बताया कि सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी ने रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी। डीएम ने रिपोर्ट के आधार पर न्यूरो साइंस सेंटर की सिस्टर इंचार्ज, आन ड्यूटी स्टाफ नर्स को दोषी पाया है। इसी तरह दो फार्मासिस्ट भी दोषी पाए गए हैं, उसमें न्यूरो साइंस सेंटर में तैनात नागेंद्र बाजपेयी और संजीव कुमार के नाम हैं। कार्रवाई से पहले समस्त कागजात की जांच कराएंगे। इसलिए शुक्रवार को बैठक बुलाई है। उससे जुड़ी समस्त पत्रावलियों का अवलोकन करेंगे, उसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

यह है प्रकरण : कोरोना की दूसरी लहर के पीक के दौरान अप्रैल माह में आपाधापी थी। ऐसे में न्यूरो साइंस सेंटर में दो संक्रमितों की मौत के बाद भी रेमडेसिविर इंजेक्शन आवंटित कर दिए गए। जब इसकी शिकायत हुई तो कालेज प्रशासन ने अपने स्तर से जांच कराई, जिसमें गड़बड़ी पाई गई। उसके बाद जिलाधिकारी ने अपने स्तर से भी जांच कराई।

सिस्टर इंजार्च व फार्मासिस्ट चल रहे निलंबित : रेमडेसिविर प्रकरण की कालेज प्रशासन ने अपने स्तर से जांच कराई थी। उसके आधार पर न्यूरो साइंस सेंटर की सिस्टर इंचार्ज और फार्मासिस्ट को प्रथम ²ष्टया दोषी पाते हुए निलंबत कर दिया गया था। उसके बाद से दोनों निलंबित चल रहे हैं। आठ स्टाफ नर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

तीन साल एक पलट पर नहीं रह सकेंगे फार्मासिस्ट : जिलाधिकारी का पत्र मिलने के बाद प्राचार्य प्रो. संजय काला ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि एलएलआर एवं संबद्ध् अस्पतालों में तैनात कोई भी फार्मासिस्ट अब एक पटल पर तीन साल से अधिक नहीं रह सकेगा। हालांकि कालेज प्रशासन ने कुछ दिन पहले ही 17 फार्मासिस्टों के पटल बदले थे। 

Edited By: Akash Dwivedi