महोबा, जेएनएन। क्रशर कारोबारी इंद्रकांत मौत प्रकरण में आरोपित आइपीएस मणिलाल पर आरोप लगाते हुए एसआइटी के समक्ष कई उद्यमियों ने बयान दिए थे कि आठ से दस पुलिस वालों की टीम थी। इन लोगों के पास ऐसे उद्यमियों की सूची थी जिनसे माह वार वसूली होती थी। कारोबार में घाटा हो या नुकसान हो जाए इससे उन लोगों को कोई फर्क नहीं था। ईडी नए सिरे से ऐसे लोगों से बयान दर्ज करा रही है। साथ ही वर्तमान में उद्यमियों से कहीं कोई वसूली तो नहीं हो रहा, कोई उत्पीडऩ तो नहीं कर रहा इसकी भी जानकारी ईडी की ओर से ली गई है।

पिछले साल सितंबर माह में वसूली मामले को लेकर ही आरोपित बर्खास्त सिपाही अरुण यादव पर भी शिकंजा कसा गया था। आरोपित सिपाही फरार आइपीएस का बहुत खास था। बांदा में तैनाती के बावजूद वह महोबा के कबरई आकर वसूली करवाता था। इसी आरोप के बाद ही कई पुलिस कर्मियों को मंडल का बाहर स्थानांतरित किया गया था। अब नए सिरे से मामले की पड़ताल कर रही ईडी ने बयान के दौरान ऐसे आरोपित पुलिस कर्मियों की कुंडली तैयार कराना प्रारंभ किया है। वहीं वर्तमान में भी व्यापार तथा उद्यमियों का शोषण करने वालों की जानकारी ईडी ने जुटाई है। बयान दर्ज कराकर लौटे कुछ उद्यमियों और दिवंगत इंद्रकांत के भाई रवि त्रिपाठी के अनुसार ईडी के अधिकारी मुख्य आरोपित आइपीएस की ओर से वसूली को लेकर किन पुलिस कर्मियों की मदद ली जा रही थी, इसकी डिटेल एकत्र कर रहे हैं।

अब तक हो चुकी कार्रवाई : फरार मुख्य आरोपित आइपीएस को भगोड़ा घोषित करने के साथ उस पर एक लाख का इनाम घोषित है। 83 (कुर्की) की कार्रवाई की जा चुकी है। मामले में पांच आरोपितों में चार पकड़े जा चुके हैं। जिसमें बर्खास्त एसओ देवेंद्र शुक्ला, बर्खास्त सिपाही अरुण यादव, आरोपित कारोबारी सुरेश सोनी व ब्रह्मदत्त जेल में हैं। इन सभी के खिलाफ चार्ज शीट दाखिल हो चुकी है।

यह था मामला : दिवंगत क्रशर कारोबारी इंद्रकांत ने सात सितंबर 2020 को तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार और कबरई के तत्कालीन एसओ देवेंद्र शुक्ला पर वसूली का आरोप लगाया था। इन लोगों से अपनी जान को खतरा बताया था, इसका आडियो, वीडियो भी वायरल किया था। मामले में मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजे थे। आठ सितंबर को इंद्रकांत गोली लगने से अपनी गाड़ी में घायल मिले थे। 13 सितंबर को कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में मौत हो गई थी। दिवंगत के भाई रविकांत त्रिपाठी ने पूर्व एसपी व एसओ सहित चार लोगों के खिलाफ कबरई थाने में मुकदमा पंजीकृत कराया था। बाद में एसआइटी जांच के दौरान सिपाही अरुण यादव का नाम भी जोड़ा गया था।

 

Edited By: Akash Dwivedi