जागरण संवाददाता, कानपुर : तमाम सुरक्षा प्रबंधों की धता बताते हुए एसएससी, सीबीएसई व सीपीएमटी जैसे परीक्षा में सेंध लगाने में परीक्षा माफिया कामयाब हो रहे। वहीं जिम्मेदार 'सोशल मीडिया में प्रश्नपत्र लीक होने पर भी पेपर आउट नहीं है।' जैसी दलील देकर अपनी सफाई के नए फार्मूले गढ़े जा रहे हैं। शहर की काकादेव कोचिंग मंडी माफिया का गढ़ बनती जा रही है। जहां परीक्षा माफिया एसएससी, बोर्ड परीक्षा और विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रश्नपत्र से लेकर उसकी नियुक्ति पत्र दिलाने तक का ठेका ले रहे हैं। इसके लिए कीमत के हिसाब से परीक्षार्थी को प्रश्नपत्र, उसकी उत्तर पुस्तिका से लेकर परीक्षा में बैठने के लिए डमी कंडीडेट (सॉल्वर) तक उपलब्ध कराया जा रहा है।

कोचिंग मंडी में प्रदेश के ही नहीं आसपास के प्रदेशों के भी बच्चे तैयारी करने के लिए आते हैं वहीं यहां आइआइटी समेत तमाम इंजीनिय¨रग कालेज व जीएसवीएम मेडिकल कालेज समेत मेडिकल कालेज है। जिनके छात्र पैसों की जरूरत के चलते परीक्षा माफिया से जुड़ जाते हैं। मध्य प्रदेश के व्यापमं (व्यवसायिक परीक्षा मंडल) घोटाले के मास्टर माइंड एवं महोबा की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के पति रमेश शिवहरे ने भी यहीं अपना ठिकाना बनाया था। जिसे एटीएफ ने जेल भेजा था।

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इन परीक्षा के पेपर लीक होने या सॉल्वर पकड़े जाने में रही भूमिका

- यूपी कंबाइंड प्री-मेडिकल टेस्ट (सीपीएमटी) की परीक्षा 25 मई-2015 को सूबे के विभिन्न केंद्रों पर हुई थी। परीक्षा के दौरान पर्चा लीक कराकर नकल कराने के आरोप में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्रथम वर्ष एमबीबीएस-2014 बैच के छात्र अंशुमान मिश्र समेत 12 लोग गिरफ्तार हुए थे।

- मध्य प्रदेश के व्यापमं (व्यवसायिक परीक्षा मंडल) घोटाले के मास्टर माइंड एवं महोबा की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के पति रमेश शिवहरे समेत जीएसवीएम मेडिकल कालेज के 57 छात्रों के नाम सामने आए। जिसमें शिवहरे समेत 37 छात्र जेल जा चुके हैं।

- गोविंदनगर स्थित खालसा इंटर कालेज में एसएससी की परीक्षा पेपर लीक होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें दो कक्ष निरीक्षकों के खिलाफ चार्टशीट दाखिल हुई। हालांकि कालेज व परीक्षा नियंत्रण विभाग सफाई देता रहा।

- आइटीबीपी में मेडिकल में पास कराने वाले गिरोह से दर्जन भर लोगों की गिरफ्तारी

- सेना भर्ती में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी।

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ऐसे चल रहा परीक्षा पास कराने का खेल

परीक्षा के आधार पर माफिया रकम तय करते हैं। मेडिकल कालेज में प्रवेश और एसएससी की परीक्षा पास कराने की बात करें तो अभ्यर्थियों से यह लोग पांच से 15 लाख रुपये में सौदा करते है। सॉल्वरों को पचास-पचास हजार रुपये दिए जाने के बाद सारी रकम खुद रख लेते हैं। गिरोह हैसियत के हिसाब से सौदेबाजी करता है।

पैसे के हिसाब से तीन प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध

अभ्यर्थियों को तीन तरीके से सुविधा मुहैया कराई जा रही है। पहला प्रश्नपत्र देते हैं। उसे सॉल्व करने की जिम्मेदारी उनकी होती है। दूसरा सॉल्व कराने का जिम्मा लेते हैं। इसमें दस से 15 हजार रुपये में डिवाइस खरीदकर अभ्यर्थियों की बनियान में लगा देते हैं और कान में ईयरफोन लगा देते हैं। यह आधुनिक ईयरफोन दिखता नहीं और सॉल्वर बाहर से प्रश्नों के उत्तर बोलते रहते हैं। वहीं नेटवर्क की प्रॉब्लम होने पर स्कूल प्रबंधन से मिलकर अभ्यर्थी को पर्ची पहुंचा देते हैं। अगर दोनों तरह से बात नहीं बनी तो अभ्यर्थी को उत्तर पुस्तिका खाली छोड़ देने को कहते हैं और बाद में आंसरशीट भरवा देते हैं। तीसरा और सबसे महंगा तरीका सॉल्वर उपलब्ध कराना है। इसमें परीक्षार्थी के स्थान पर डमी कंडीटेड जाता है। जो परीक्षा देता है। अब तो यह लोग सेना भर्ती में होने वाली दौड़ के लिए भी डमी कंडीडेट उपलब्ध कराने लगे हैं।

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ऐसे तैयार किया नेटवर्क

व्यापमं घोटाले के मास्टर माइंड रमेश शिवहरे ने एचबीटीआइ से बीटेक करने के बाददोस्त संग काकादेव में कोचिंग में पेपर लीक करने से लेकर सॉल्वर गैंग चलाया। यह सिर्फ एक बानगी है। यहां पर तैयारी करने वाले छात्रों के साथ इंजीनिय¨रग व मेडिकल कालेज से सॉल्वर तैयार करने के लिए कोई शक न करे, इसके लिए परीक्षा माफिया कोचिंग संचालन की आड़ लिए हैं। कोचिंग मंडी में इंजीनिय¨रग व मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने वाले तमाम छात्र-छात्राओं को फंसाते है। इनका नेटवर्क प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ बोर्ड परीक्षा तक भी फैला हुआ है। यह लोग प्रतियोगी परीक्षा में पेपर आउट कराने से लेकर भर्ती कराने का जिम्मा लेते हैं, इनके जरिए रेलवे, बीडीओ, लेखपाल व बैंक में भर्ती करा रहे हैं।

Posted By: Jagran

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