जागरण संवाददाता, कानपुर : स्वास्थ्य महकमे के सभी अस्पतालों में दवा खरीद की केंद्रीयकृत व्यवस्था लागू हो गई है। नये वित्तीय वर्ष से यूपी मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन दवाओं से लेकर सर्जिकल आइटम की आपूर्ति करेगा। इसके दायरे में शहर के उर्सला-डफरिन से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) भी आएंगे। नई व्यवस्था लागू होने से अस्पताल प्रशासन बजट की कमी एवं दवाएं खत्म होने का बहाना भी नहीं बना सकेंगे। अस्पतालों में दवाओं से लेकर सर्जिकल आइटम की खरीद में व्यापक पैमाने पर शिकायतें मिल रहीं थी। ऐसे में सूबे में योगी सरकार बनने के बाद पुरानी व्यवस्था को ही बदल दिया। अब दवाओं की आपूर्ति के लिए कार्पोरेशन का गठन किया गया है। जो स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में जरूरत के हिसाब से दवाओं की आपूर्ति करेगा।

गठित करनी होगी कमेटी

सीएमओ कार्यालय एवं जिला अस्पतालों में कमेटी गठित की जाएगी। अधिकारियों को शासन से स्पष्ट निर्देश हैं कि पहले कमेटी गठित करें। उसके बाद दवाओं की आपूर्ति के लिए लिस्ट तैयार करें। तब उसे कार्पोरेशन को भेजें।

स्वास्थ्य विभाग व उर्सला में बनीं कमेटी

स्वास्थ्य विभाग में सीएमओ की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। मुख्य औषधि भंडार के प्रभारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के दो डॉक्टर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के दो डॉक्टरों तथा एक चीफ फार्मासिस्ट को शामिल किया गया है। इसी तरह उर्सला में निदेशक की अध्यक्षता तथा डफरिन अस्पताल में प्रमुख अधीक्षक की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है।

पहले यह थी व्यवस्था

पहले महानिदेशक स्तर पर टेंडर प्रक्रिया के तहत दवाओं के रेट कांट्रेक्ट होते थे। दवा कंपनियां सूबे के जिलों में स्थित अस्पतालों के आर्डर के मुताबिक दवाओं की आपूर्ति कर दी थीं। दवाओं की खरीद के लिए अस्पतालों को अलग-अलग बजट आवंटित किया जाता था।

बोले जिम्मेदार

अस्पतालों की जरूरत के हिसाब से दवाओं की सूची तैयार की गई है। इसमें पीएचसी के लिए अलग, सीएचसी के लिए अलग एवं जिला अस्पताल के लिए अलग दवाओं की डिमांड की गई है। इन दवाओं की एक पूरी सूची तैयार कर ली गई है, जल्द ही शासन को भेजेंगे।

- डॉ. आरसी आर्या, प्रभारी व एसीएमओ, मुख्य औषधि भंडार, सीएमओ कार्यालय।

अस्पताल के लिए दवाएं मंगाने के लिए कमेटी गठित कर ली गई है। साल भर की दवाएं व सर्जिकल आइटम की सूची शासन को भेजने की तैयारी है। अभी तक अस्पताल को दवाओं के लिए दो करोड़ रुपये व सर्जिकल आइटम के लिए 10 लाख रुपये बजट मिलता था, जो अब नहीं मिलेगा।

- डॉ. उमाकांत, निदेशक, उर्सला अस्पताल।

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