कानपुर, जागरण संवाददाता। Leopard In Kanpur : वन विभाग की लापरवाही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान व राष्ट्रीय शर्करा संस्थान में रह रहे दर्जनों परिवारों पर भारी पड़ रही है। तेंदुए की चहलकदमी फिर से शुरू होने पर वह सहमे हैं और दिन में भी बच्चों को अकेले घरों से बाहर नहीं जाने देते। हाल ही में लखीमपुर से चिड़ियाघर आए तेंदुए की तरह कहीं यह तेंदुआ भी खूंखार न हो, यही चिंता सता रही है। 

तेंदुए को शहर में आए एक माह बीत गए, लेकिन वन विभाग की टीम उसे पकड़ नहीं पा रही। शुरुआत के 15 दिन आइआइटी व एनएसआइ में रहने के बाद तेंदुआ ओएफसी व स्माल आर्म्स फैक्ट्री के जंगल में भी घूमता रहा, लेकिन टीम जाल व पिंजरा लगाए उसके खुद ही फंसने का इंतजार करती रही। करीब आठ दिन तक तेंदुए के न दिखने पर दो दिन पहले वन विभाग ने मान लिया था कि तेंदुआ शहर से बाहर चला गया है। इसी वजह से कैमरे, पिंजरे, जाल आदि हटा लिए गए थे। अब जब वह फिर से लौटा है तो विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। 

आइआइटी के सुरक्षा अधिकारी आशुतोष शर्मा ने बताया कि गुरुवार रात तेंदुआ दो बार संस्थान में नजर आया। इसके बाद शुक्रवार तड़के वह एनएसआइ चला गया, लेकिन शुक्रवार की रात वह कहीं भी नजर नहीं आया। वहीं एनएसआइ के सुरक्षा प्रभारी डा. सुधांशु मोहन ने बताया कि शुक्रवार सुबह से लेकर शनिवार रात तक तेंदुए की कोई मूवमेंट नहीं दिखी है। माना जा रहा है कि वह कहीं छिपकर बैठा है और वन विभाग की टीम उसकी लोकेशन नहीं ढूंढ पा रही है। संस्थान में रहने वाले परिवार इसलिए ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि कुछ समय पहले ही लखीमपुर में तेंदुए ने तीन लोगों को शिकार बनाया था। हालांकि वह तेंदुआ पकड़ा गया है, लेकिन यह तेंदुआ पकड़ा नहीं गया।

Edited By: Ekantar Gupta

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