कानपुर, जेएनएन। बुधवार से श्रावण मास का शुभारंभ हो गया, भोर पहर से ही मंदिरों में भक्तों की कतार लग रही है। भक्तों ने महादेव का जलाभिषेक किया और बिल्वार्चन, अक्षतार्चन कर भांग-धतूरा, पुष्प अर्पित कर पूजन किया। नागेश्वर मंदिर नयागंज, खेरेपति मंदिर, शिवाला स्थित कैलाश मंदिर, कालेश्वर मंदिर , बूढ़ेश्वर मंदिर परमपुरवा, शिव मंदिर किदवई नगर, जागेश्वर मंदिर नवाबगंज, वनखंडेश्वर मंदिर पी रोड, खेरेश्वर धाम शिवराजपुर आदि प्रमुख मंदिरों में भक्त पूजन के लिए पहुंचते रहे।

ज्योतिर्लिङ्ग के स्मरण से मिलता ऐश्वर्य

द्वादश ज्योतिर्लिङ्ग के रूप में भगवान शिव खुद ही विराजमान हैं। देश में 12 स्थलों पर ज्योतिर्लिङ्ग के दर्शन होते हैं। नित्य प्रात: काल ज्योतिर्लिङ्ग स्मरण करना चाहिए। इससे सात जन्मों के पापों का शमन होता है। इनमें सोमनाथ, मल्लिकार्जुनम, महाकाल, ओंकारेश्वर, वैद्यनाथ, भीमशंकर, रामेश्वरम, नागेश्वर, काशी विश्वनाथ, त्र्यम्बकेश्वर, घृष्णेश्वर व केदारनाथ।

द्वादशज्योतिर्लिङ्गस्मरणम्      

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम् ॥ परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्। सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥ वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे। हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥ एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रात: पठन्नेर:। सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति॥

बेल पत्र अर्पित करते समय इस मंत्र का जप

भगवान शिव को बेल पत्र अति प्रिय है। बेल पत्र अर्पित करने से प्रभु प्रसन्न होते हैं। पूजन के समय इस मंत्र का जप करें...। 'त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्। त्रिजनमपापसंहारं बिल्पपत्रं शिवार्पणम्।। दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्। अघोरपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम।।

खुद ही करें महादेव का अभिषेक

श्रावण मास में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। श्रद्धालु खुद ही अभिषेक कर सकते हैं। मंत्र जाप नहीं आता तो भगवान शिव के नामों का जप करते हुए प्रभु को सामग्री अर्पित कर सकते हैं। ज्योतिषविद् केए दुबे पद्मेश के मुताबिक प्रभु एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। शास्त्रों मेें शिवलिंग के अलग- अलग प्रकार बताए गए हैं। इनमें पार्थिव लिंग, स्फटिक के शिवलिंग, पारस पत्थर से बने शिव लिंग आदि शामिल हैं। जो साधक किसी नदी, सरोवर या तालाब के किनारे मिट्टी या बालू से बने शिवलिंग का अभिषेक करता है उसकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

अभिषेक में इन पदार्थों का प्रयोग

दूध, दही, शहद, घी, रोली, चंदन, काला तिल, अभ्रक, नारियल के जल, केवड़ा, कमलगट्टा, जौ, साठी का चावल, जल, अबीर, गुलाल, गुलाब जल, इत्र, पुष्प, जनेऊ, मंदार पुष्प,भस्म, बेल पत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र से अभिषेक करें

चमेली के तेल से अभिषेक

शिव का नाम जपने से अभीष्ट की सिद्धि प्राप्ति होती है। अलग- अलग दिन अलग- अलग पदार्थों से प्रभु का अभिषेक करना चाहिए। सोमवार के दिन गन्ने के रस या गुड़ मिले जल से अभिषेक करना चाहिए। गुरुवार के दिन हल्दी मिश्रित जल से अभिषेक करना अति उत्तम होगा। शनिवार के दिन भगवान का चमेली के तेल से अभिषेक करना चाहिए। रविवार के दिन गौमूत्र से अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के समय यदि सामथ्र्य है तो भगवान को यज्ञोपवीत, सफेद रंग का वस्त्र अवश्य अर्पित करना चाहिए।

इनका करें जाप

ऊॅँ मृत्युंज्जयाय नम: , ऊॅँ शशिशेखराय नम: , ऊॅँ जटाधराय नम: , ऊॅँ महाकालाय नम:, ऊॅँ शूलपाणिने नम: नाम, ऊॅँ अघोराय नम, ऊॅँ पशुपतये नम:, ऊॅँ शर्वाय नम:, ऊॅँ विरूपाक्षाय नम:, ऊॅँ विश्वरूपिणे नम:, ऊॅँ त्र्यम्बकाय नम:, ऊॅँ कपर्दिने नम:, ऊॅँ भैरवाय नम:, ऊॅँ शूलपाणये नम:, ऊॅँ ईशानाय नम:, ऊॅँ महेश्वराय नम: का जाप करें।

मां पार्वती का करें पूजन

ऊॅँ उमाये नम:, ऊॅँ शङ्करप्रियायै नम:, ऊॅँ पार्वत्यै नम:, ऊॅँ गौर्ये नम:, ऊॅँ काल्यै नम:, ऊॅँ कालिन्द्यै नम:, ऊॅँ कोटर्यै नम:, ऊॅँ विश्वधारिण्यै नम:, ऊॅँ ह्रां नम: , ऊॅँ ह्रीं नम:, ऊॅँ गङ्गादेव्यै नम: का जाप करें। इससे मां पार्वती व अन्य देवियों की कृपा प्राप्त होगी।

मंदिरों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम

सावन माह में भक्तों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिरों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैैं। आनंदेश्वर मंदिर सहित एक दर्जन मंदिरों में मजिस्ट्रेट और पुुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। आनंदेश्वर मंदिर में दो शिफ्टों में मजिस्ट्रेट तैनात रहेंगे। एक एसपी व दो सीओ और आधा दर्जन थानों की पुलिस सुरक्षा मेें तैनात रहेगी। अन्य मंदिरों में एक-एक मजिस्ट्रेट तैनात होंगे। सफाई व्यवस्था के लिए अलग-अलग शिफ्टों में सफाई कर्मचारी तैनात हैं। अन्य मंदिरों में भी दिन में एक बार कूड़ा उठेगा। आनंदेश्वर मंदिर व सिद्धनाथ मंदिर में पेयजल व्यवस्था के लिए टैंकर और एंबुलेंस की व्यवस्था भी है।

रविवार की आधी रात मंदिरों के खुलने का समय

आनंदेश्वर मंदिर : सोमवार को भोर में दो बजे खुलेगा, सुबह 11.30 बजे बंद होगा, 12.30 बजे खुलेगा। शाम को 7.30 बजे बंद होगा और 8.15 बजे खुलेगा। इसके बाद दो बजे बंद होगा।

जागेश्वर मंदिर : भोर में 3.45 बजे खुलेगा, 11.45 बजे बंद होगा। 12.15 खुलेगा और रात्रि में 10.30 बजे बंद होगा। सिद्धनाथ मंदिर: भोर में चार बजे खुलेगा, 12 बजे बंद होगा, फिर 12.30 बजे खुलेगा, रात में 11.30 बजे बंद होगा।

नागेश्वर मंदिर : सुबह पांच बजे खुलेगा, 12 बजे बंद होगा, 12.30 बजे खुलेगा, रात्रि 12 बजे बंद होगा।

Posted By: Abhishek

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