आजादी के बाद से हर घर में उजाला फैलाने के लिए हर सरकार दावे करती रही। पहले लाखों फिर करोड़ों और अब सैकड़ों करोड़ के बिजनेस प्लान बनाकर लोगों के घर तक बिजली पहुंचाने का सपना दिखाया जाता रहा। कहीं विरोध प्रदर्शन हुआ तो वहां बिजली के तार खींचने का सामान पहुंचाकर गुस्से को फौरी तौर पर शांत करने की कोशिशें होती रहीं। लेकिन हकीकत इन मजरों की रात जैसी स्याह है। जिले के 1792 मजरे आज भी रोशनी के लिए तरस रहे हैं। हर दर पर गुहार के बाद हाकिमों को उन पर तरस नहीं आ रहा है। ये मजरे उन हर सरकारों के दावे झुठला रहे हैं जो हर घर में रोशनी पहुंच जाने का दावा करतीं रहीं हैं। ये मजरे अब भी इस आशा में हैं कि सरकार सुध लेगी और उन्हें अंधेरे की इस गुलामी से निजात मिल जाएगी। सरकारी फाइलों में कैद बिजली बाहर निकलेगी और उनका गांव रोशन हो जाएगा।

केस स्टडी एक: बिठूर विधानसभा की ग्राम पंचायत बनी का मजरा दयालपुर है। बनी से इसकी दूरी करीब 500 मीटर है। बनी गांव में पिछले 20 वर्षो से बिजली है मगर दयालपुर आज भी उजाले के लिए तरस रहा है।

केस स्टडी दो: बिठूर विधानसभा की ग्राम पंचायत पेम का गाव है गोसाइनपुरवा दो साल पहले यहां अंडर ग्राउंड केबिल बिछाई गई। दो ट्रांसफार्मर भी वहां जमीन पर रखे हुए हैं। इसके बाद भी अब तक बिजली नहीं आई।

जागरण संवाददाता: कानपुर: मजरा दयालपुर और गोसाइनपुरवा गांव तो महज बानगी है। सच्चाई यह है कि आजादी मिलने के कई सालों बाद भी बिजली सर्व सुलभ नहीं हो सकी है। यह स्थिति तब है जब जमाना फोर जी और ऑनलाइन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में जब कई गांव और मजरे बिना बिजली और लाइन के हैं तो स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

कानपुर नगर में दो डिस्काम से बिजली की आपूर्ति की जाती है। एक केस्को और दूसरा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड है। केस्को जहां नगरीय क्षेत्र में तो वहीं दक्षिणांचल से देहात क्षेत्रों की तहसील और ग्राम पंचायतों में बिजली की सप्लाई होती है। शहरीय क्षेत्र में जहां केस्को की सप्लाई है वहां आबादी बिजली कटौती फाल्ट, लाइन लास से बिजली की किल्लत झेलती है तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में 1792 मजरे और गांव ऐसे हैं जहां पर अभी तक बिजली पहुंची ही नहीं है। ऐसे स्थानों को को दीनदयाल ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत बिजली देने की कवायद चल रही है। बात अगर केस्को की हो तो बजट की कमी के कारण अभी भी दशकों पुराने 6.6 केवी के ट्रांसफार्मर लगे हैं। जो कि बीते वर्ष 2017 से सेन्ट्रल गवर्नमेंट की आइपीडीएस योजना के तहत 11 केवी में बदलने का काम शुरु हो गया है।

संसाधन पूरे लेकिन नहीं रोक पा रहे बिजली चोरी

केस्को के पास शहरी क्षेत्र में 20 डिवीजन , 87 सब स्टेशन और 4815 ट्रांसफार्मर हैं। बात अगर लोड की हो तो वर्ष 2017 की गर्मी जिसे पीक सीजन कहा जाता है इसमें अधिकतम लोड 710 मेगावाट गया था, अब सैकड़ों नए ट्रांसफार्मर, सब स्टेशन का अपग्रेडेशन, पावर ट्रांसफार्मर लग जाने आदि की वजह से सिस्टम 900 मेगावाट तक का लोड ले सकता है। इन संसाधनों के बाद भी केस्को बिजली चोरी रोकने में नाकाम है। हर साल हो रहे करोड़ों के घाटे को पूरा करने के लिए बिजली टैरिफ बढ़ा दिया जाता है और पैसा देकर बिजली का उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं की जेब कटती है।

ये हैं केस्को के सर्वाधिक लाइन लॉस वाले डिवीजन

-बिजली घर परेड

-जरीब चौकी

-फूलबाग

-किदवई नगर

-दहेली सुजानपुर

केस्को के 132 केवी क्षमता के ट्रांसमिशन स्टेशन

-मेहरबान सिंह का पुरवा

-दादानगर

-जवाहरपुरम

-आजाद नगर

-कृष्णा नगर

केस्को के 220 केवी क्षमता के ट्रांसमिशन स्टेशन

-पनकी

-बिठूर

-आरपीएच

-नौबस्ता

-रूमा

दक्षिणांचल के सब स्टेशन

-बिधनू

-मेहरबान सिंह का पुरवा

-सचेंडी

-सरसौल

-नर्वल

-साढ़

-महाराजपुर

यह बोले लोग

वोट लेने के लिए हर बार लोग आते हैं आश्वासन भी देते हैं लेकिन अबतक लाइट नहीं आई।-सुशील कुमार, दयालपुर

गांव के लोगों को लुभाने के लिए बिजली के खंभे भेज दिए गये, चुनाव खत्म हो गया और सारे वादे भूल गए।-शिवनाथ यादव, दयालपुर

बिजली न आने से बच्चों को पढ़ाई करने में काफी समस्या आती है आज के समय में दिया और लैंप से काम चलाना पढ़ता है।-महेन्द्र सिंह, दयालपुर

गांव में सूर्योदय के साथ जिंदगी शुरु होती है और सूर्यास्त होते ही गांव अंधेरे में डूब जाता है।-राजेन्द्र सिंह, दयालपुर

यह बोले जिम्मेदार

बिजली व्यवस्था पहले से काफी सुधरी है, कई बार फाल्ट के चक्कर में लाइट चली जाती है। लाइन अपग्रेडेशन हो रहा है, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कटियाबाजी रोकने के लिए अंडर ग्राउंड केबिलिंग की जा रही है।-एसएन तिवारी, मुख्य अभियंता, केस्को।

दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत ऐसे स्थानों पर जहां बिजली पूरी तरह से नहीं पहुंच पाई है वहां का सर्वे करवाकर लगभग छह माह में बिजली पहुंचाई जाएगी।- रिछपाल सिंह तोमर, मुख्य अभियंता, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड।

By Jagran