नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। ठीक एक सप्ताह पूर्व शुक्रवार (03 जुलाई की) सुबह कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया। एक सप्ताह बाद शुक्रवार (10 जुलाई) की सुबह विकास दुबे मुठभेड़ में ढेर हो गया। इस एक सप्ताह में पुलिसकर्मियों की हत्या से लेकर विकास दुबे को अंजाम तक पहुंचाने की पूरी कहानी इतनी फिल्मी है कि लोगों को न तब विश्वास हो रहा था और न अब हो रहा। किसी फिल्मी कहानी की तरह इस पूरे कांड में इतने संयोग हैं कि सवाल खड़ा होना लाजमी है। वहीं, लखनऊ से लेकर कानपुर और एसटीएफ तक के आला पुलिस अधिकारी भी पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को नहीं जोड़ पा रहे। आइये जानते हैं कौन-से हैं वो 12 अनसुलझे सवाल, जिनका जवाब देने से बच रही यूपी पुलिस।

1. विकास दुबे के खाकी वाले साथी

2-3 जुलाई को विकास दुबे ने जिस तरह से 8 पुलिसकर्मियों को पूरी तैयारी के साथ मौत के घाट उतारा, उससे साफ है कि उसे पुलिस कार्रवाई की सूचना मिल चुकी थी। किसने दी थी ये सूचना और कौन हैं विकास दुबे के खाकी वाले साथी।

2. क्या बेनकाब होंगे सफेदपोश

विकास दुबे की पहुंच केवल यूपी पुलिस तक ही नहीं थी, बल्कि सत्ता के गलियारों में भी उसने गहरी जड़ें जमा रखीं थीं। लगभग हर राजनीतिक पार्टी से उसका गठजोड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि विकास दुबे की मौत के बाद, उसे शरण देने वाले सफेदपोश बेनकाब होंगे।

3. जिन पुलिस वालों से असलहा छीना उन पर क्या कार्रवाई हुई

यूपी पुलिस का दावा है कि गुरुवार तड़के फरीदाबाद से गिरफ्तार कर कानपुर लाए जा रहे विकास दुबे के साथी प्रभात मिश्रा ने कानपुर के पनकी के पास गाड़ी पंक्चर होने के बाद एक दारोगा की पिस्टल छीन ली और पुलिसवालों पर फायरिंग करते हुए भागने लगा। किसी पुलिसकर्मी से उसका हथियार छिनना बड़ी लापरवाही मानी जाती है। अमूमन इस तरह की घटना में पुलिस संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई करती है। जिस दारोगा से प्रभात ने पिस्टल छीनी उस पर क्या कार्रवाई हुई। इसी तरह विकास दुबे ने जिस पुलिसकर्मी से पिस्टल छीनी क्या उस पर भी कोई कार्रवाई होगी।

4. 24 घंटे के भीतर फिर पुलिसवाले से छीना हथियार

प्रभात मिश्रा एनकाउंटर के लगभग 24 घंटे के भीतर ही यूपी पुलिस के एक और दारोगा की पिस्टल छीन ली गई। ये दारोगा उस पुलिस टीम का हिस्सा था, जो 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी 5 लाख रुपये के इनामी बदमाश विकास दुबे को उज्जैन से सड़क मार्ग के जरिये कानपुर ला रही थी। 24 घंटे के भीतर एक ही गिरोह के दो बदमाशों को पुलिस अभिरक्षा में लाते वक्त वाहन खराब होना या दुर्घटनाग्रस्त होना और फिर पुलिसकर्मी का हथियार छीन फायरिंग करते हुए भागने का प्रयास करना क्या महज संयोग है।

5. कानपुर में ही हुए दो एनकाउंटर

आमतौर पर पुलिस अपराधियों की गिरफ्तारी और मुठभेड़ अपने क्षेत्र में ही दिखाती है, ताकि उसकी जांच और लिखापठी सब उनके दायरे में हो। अगर किसी अन्य जिले या राज्य में ऐसी मुठभेड़ हुई तो संबंधित इलाके की ही पुलिस जांच करेगी। ऐसे में प्रभात मिश्रा और फिर विकास दुबे दोनों का एनकाउंटर कानपुर में ही होना क्या ये भी महज संयोग है।

6. विकास को सड़क मार्ग से क्यों ला रही थी पुलिस

उज्जैन जाने से पहले यूपी पुलिस के आला अधिकारियों ने तय किया था कि विकास दुबे को चार्टर्ड प्लेन से लाया जाएगा। फिर अचानक से उसे रात में सड़क मार्ग से क्यों लाया जा रहा था। सड़क मार्ग काफी लंबा है और इस दौरान विकास के भागने या उसके गिरोह द्वारा पुलिस टीम पर हमला करने का भी खतरा था।

7. मुठभेड़ से ठीक पहले वाहनों को क्यों रोका गया 

उज्जैन से विकास को लेकर रवाना हुई पुलिस टीम के साथ मीडियाकर्मियों की भी गाड़ियां थीं। पुलिस ने उन्हें कई बार रोकने का प्रयास किया। मुठभेड़ से ठीक पहले घटनास्थल से काफी मीडियाकर्मियों सहित सभी निजी वाहनों को क्यों रोका गया था। गाड़ियों को रोकने से पहले विकास को ला रही पुलिस टीम की कुछ मीडियाकर्मियों से पीछा न करने को लेकर झड़प की भी खबरें हैं।

8. क्या गाड़ी भी संयोग से पलटी

पुलिस की गाड़ी सर्विस लेन पर जिस जगह पलटी है, वहां फेंसिंग में गैप देकर मुख्य लेन से सर्विस लेन पर जाने की जगह बनाई गई है। मतलब पुलिस की सर्विस लेन पर गाड़ी ठीक उसी जगह पलटी जहां पहले से डिवाइड और फेंसिंग में गैप था। क्या ये भी महज संयोग था।

9. पुलिस मुठभेड़ में मारे गए 6 वांछित

पुलिस को इसका प्रशिक्षण दिया जाता है कि भागते वक्त भी वह बदमाश के पैर में गोली मार सके, ताकि उसे जिंदा गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जा सके। इस कांड में आठ दिन में छह बदमाशों का पुलिस एनकाउंटर में मारा जाना। वो भी सभी को कमर के ऊपर गोली लगना। क्या ये भी क्या महज संयोग है।

10. क्या विकास की गाड़ी बदली गई थी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उज्जैन से यूपी पुलिस विकास दुबे को टाटा सफारी गाड़ी में लेकर निकली थी। पुलिस की जो गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई, जिससे विकास दुबे के भागने की बात कही जा रही है वो टीयूवी 300 थी।न्यूज चैनलों पर टाटा सफारी में बैठे विकास दुबे की वीडियो फुटेज भी चल रही है। हालांकि, कानपुर आईजी मोहित अग्रवाल ने विकास दुबे की गाड़ी बदलने की बात से इनकार किया है। अगर सुरक्षा की दृष्टि से गाड़ी बदली भी गई तो पुलिस इस क्यों छिपा रही।

11. उज्जैन में न तो एफआईआर हुई न कोर्ट में पेश किया

विकास दुबे उज्जैन में गिरफ्तार हुआ, वहां अधिकारियों ने पूछताछ की। गृहमंत्री ने बयान भी दिया और मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों ने भी प्रेसवार्ता की। उज्जैन में गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को विकास दुबे के बैग से एक चाकू भी बरामद हुआ। बावजूद उसके खिलाफ न तो उज्जैन में एफआईआर दर्ज हुई और न ही स्थानीय कोर्ट में पेश कर उसे यूपी लाने के लिए ट्रांजिड रिमांड लिया गया।

12. मुठभेड़ की कड़ियां जोड़ने में नाकाम पुलिस

मुठभेड़ के बाद लखनऊ से लेकर कानपुर और यूपी एसटीएफ समेत यूपी पुलिस के आला अधिकारी मीडिया के सवालों से बचते रहे। पुलिस अधिकारी विकास दुबे मुठभेड़ की कड़ियां जोड़ने में क्यों नाकाम हैं।

Posted By: Amit Singh

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