कानपुर मंडलायुक्त ने शासन को भेजी CDO की जांच रिपोर्ट, 15 से अधिक फर्मों के दस्तावेजों में मिली गड़बड़ी
कानपुर नगर निगम में टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज और नियमों की अनदेखी के मामले में सीडीओ की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
कानपुर नगर निगम टेंडर में फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी।
सीडीओ की जांच में 15 से अधिक फर्मों के दस्तावेज में गड़बड़ी।
ठेकेदारों, अधिकारियों, पार्षदों की मिलीभगत के साक्ष्य भी मिले।
जागरण संवाददाता, कानपुर। नगर निगम में टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज लगाने और नियमों की अनदेखी करने के मामले की जांच की आंच अब ठेकेदारों से आगे बढ़कर अधिकारियों और कुछ पार्षदों तक पहुंच गई है।
मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव जे. जैन की अध्यक्षता में हुई जांच में 15 से अधिक फर्मों के पंजीकरण और टेंडर से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त के. विजयेन्द्र पांडियन ने शासन को भेज दी है। रिपोर्ट के आधार पर मामले में कार्रवाई शासन स्तर से की जाएगी।
29 अगस्त को गठित जांच कमेटी ने नगर निगम में पंजीकृत फर्मों के दस्तावेज, ठेकेदारी की प्रक्रिया और विभिन्न टेंडरों में भागीदारी की पड़ताल की। जांच के दौरान कुछ फर्मों के दस्तावेजों में ऐसी कमियां सामने आईं, जिनसे उनके पंजीकरण और टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में टेंडर हासिल करने और काम बांटने के लिए आपसी सांठ-गांठ के साक्ष्य भी मिले हैं। जांच में ठेकेदारों के साथ कुछ अधिकारियों और पार्षदों की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, किसकी भूमिका कितनी है और किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ, इस बात को सार्वजनिक नहीं किया गया।
जांच के दायरे में निर्माण कार्य और बिलिंग
मामले की विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। इसमें लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है।
समिति टेंडर प्रक्रिया के साथ उन निर्माण कार्यों की भी जांच की है, जिनके ठेके संबंधित फर्मों को दिए गए। काम की गुणवत्ता, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और फर्जी बिलिंग के मामले भी पकड़ में आए हैं।
इसके अलावा नगर निगम में पेट्रोल-डीजल के खर्च में सामने आई अनियमितताओं को भी पकड़ा गया है। इसके साथ ही नगर निगम कर्मचारियों और आउटसोर्सिंग कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है।
सीडीओ की अध्यक्षता वाली जांच में कई फर्मों के दस्तावेजों में अनियमितताएं मिली हैं। रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। विस्तृत जांच में टेंडर प्रक्रिया, निर्माण कार्य, बिलिंग और अन्य संबंधित बिंदुओं की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -के. विजयेन्द्र पांडियन, मंडलायुक्त।
