कानपुर, जागरण संवाददाता। शादी अनुदान योजना और पारिवारिक लाभ योजना में समाज कल्याण अधिकारी व उप निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण निलंबित हुईं। समाज कल्याण विभाग का एक लिपिक जेल भेजा गया। 19 लेखपालों को निलंबित करने के साथ ही उन पर मुकदमा हुआ, लेकिन जो अपात्र हैं वे मौज काट रहे हैं। फर्जी कागजातों के सहारे योजना का लाभ लिया और अब उसे वापस भी नहीं किया। समाज कल्याण विभाग की ओर से वसूली के लिए नोटिस तक जारी नहीं किया गया, जबकि निदेशक समाज कल्याण खुद कह चुके हैं कि अपात्रों से वसूली की जाए। वहीं, समाज कल्याण अधिकारी इसके पीछे चुनाव आहार संहिता लागू होने की दुहाई दे रहे हैं, जबकि किसी पर कार्रवाई से आचार संहिता नहीं रोकती है।

यह है मामला: शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में हुए भ्रष्टाचार की जांच में प्रशासन स्तर से ही बड़ा खेल हुआ। मई में पहली बार जांच हुई तो शादी अनुदान योजना में 706, जबकि पारिवारिक लाभ योजना में 1106 लोगों के पते गलत मिले। 204 अपात्र पाए गए। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर समाज कल्याण अधिकारी को निलंबित कर दिया गया, लेकिन जब बात तहसीलदार, एसडीएम तक आई तो दोबारा जांच कराई गई। दावा किया गया कि कुल 409 अपात्र मिले हैं। इनमें 198 लाभार्थी पारिवारिक लाभ योजना के हैं। इनसे 59.40 लाख रुपये वसूले जाएंगे। शादी अनुदान के 211 लाभार्थी अपात्र हैं जिनमें 10 पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के और 46 लाभार्थी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के हैं। शेष समाज कल्याण विभाग के हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने वसूली शुरू कर दी, लेकिन समाज कल्याण विभाग की ओर से एक भी अपात्र को नोटिस जारी नहीं किया गया है।

36 कर्मचारी-अधिकारी फंसे : इस फर्जीवाड़े में दो नायब तहसीलदार, एक तहसीलदार, 21 लेखपाल, आठ कानूनगो, दो अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, पिछड़ा वर्ग विभाग के दो उप निदेशक, समाज कल्याण अधिकारी समेत 36 अधिकारी कर्मचारी फंसे। समाज कल्याण अधिकारी बाद में शासन की जांच में बरी हुए ।

इस तरह हुआ फर्जीवाड़ा : एसडीएम सदर की लागइन से उनके डिजिटल हस्ताक्षर कर उन लोगों के फार्म संबंधित विभागों को भेजे गए जो वास्तव में अपात्र थे। जिनकी बेटियां नहीं थीं उनके नाम का शादी का कार्ड छपवाया गया और उन्हें अनुदान दिलाया गया। इसी तरह जिनके परिवार का कोई कमाऊ सदस्य मृत नहीं हुआ वे भी लाभ पाने में कामयाब हो गए।

क्या कहती है चुनाव आचार संहिता : समाज कल्याण अधिकारी अवनीश यादव कहते हैं कि चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। इसलिए अभी वसूली संबंधी कोई कार्रवाई नहीं कर सका हूं। पत्रावली मांगी गई है। चुनाव बाद जिलाधिकारी व सीडीओ को कार्रवाई के लिए पत्रावली भेजी जाएगी। वहीं, विशेषज्ञ कहते हैं कि समाज कल्याण अधिकारी के पास चुनाव आचार संहिता लागू होने का बहाना है, जबकि किसी पर कार्रवाई करने से आचार संहिता नहीं रोकती है।

Edited By: Abhishek Agnihotri