कानपुर, जेएनएन। शासन और प्रशासन द्वारा लगातार दावा किया जा रहा है कि ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। मरीजों की संख्या अधिक होने से बेड जरूर भरे हुए हैं लेकिन किसी को वापस नहीं भेजा रहा है। शासन और प्रशासन के इन दावों से इतर हकीकत कुछ और ही है। अस्पतालों में तैनात प्रशासन के नोडल अधिकारी खुद अफसरों के दावों को झूठा साबित कर रहे हैं।

पड़ताल-1: आर्यनगर के चांदनी नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी पीके सिंह बनाए गए हैं। रात दो बजे इन्हें एक 60 वर्षीय महिला की गंभीर स्थिति का हवाला देकर भर्ती कराने के लिए फोन किया गया। उन्हें यह भी बताया गया कि महिला का ऑक्सीजन लेवल 58 है। इस पर नोडल अधिकारी का जवाब था कि न तो बेड हैं और न ही ऑक्सीजन, कहां भर्ती करा दें। फिर पूछा गया क्या इसकी सूचना प्रशासन को दी है। तो उनका जवाब था, रोज सूचना देते हैं। 

पड़ताल-2 : लाजपत नगर स्थित मरियमपुर अस्पताल का नोडल अधिकारी प्रशासन ने अजमत उल्लाह अंसारी को बनाया है। अस्पताल में इनकी ड्यूटी रात की है। देर रात जब इन्हें महिला की सीरियस हालत का हवाला देकर बेड दिलाने की बात कही गई तो उन्होंने साफ इन्कार कर दिया। बोले, बेड खाली नहीं है। नोडल अधिकारी ने बेड इंचार्ज और अस्पताल के पूछताछ केंद्र के कर्मचारी का नंबर देकर अपना पल्ला झाड़ दिया। 

प्रशासन के दावे की पोल खेल रहे केस

ऊपर दिए गए दो केस प्रशासन के बंदोबस्त और दावों की पोल खोल रहे है। संवाददाता द्वारा की गई पड़ताल हकीकत का आईना दिखाने के साथ ये भी साबित कर रही है कि कागजी व्यवस्था में चाक चौबंद प्रशासन दरअसल धरातल पर फेल है। सोमवार की देर रात एक महिला को बेड दिलाने के लिए जब अस्पतालों के इन नोडल अधिकारियों से बात की गई तो उनका स्पष्ट जवाब था, न तो बेड हैं और न ही ऑक्सीजन। ऐसे में कहां भर्ती करा दें। नोडल अधिकारी ने इस बात को भी माना कि प्रशासन को सूचना दे दी है। ऐसे में साफ है कि अस्पतालों की हकीकत जानने के बाद भी प्रशासनिक अफसर ऑल इस वेल का दावा करके शहरवासियों को धोखे में रख रहे हैं।

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