कानपुर NTC की बंद मिलों की जमीन का बदलेगा भू-उपयोग, छोटे कपड़ा उद्योग शुरू करने की तैयारी
कानपुर में बंद पड़ी एनटीसी की पांच मिलों की 370 एकड़ से अधिक जमीन के व्यावसायिक उपयोग की प्रक्रिया फिर शुरू हुई है।

एनटीसी की बंद मिलों की जमीन का बदलेगा भू-उपयोग।
HighLights
एनटीसी की पांच बंद मिलों की जमीन का पुनर्मूल्यांकन।
370 एकड़ से अधिक जमीन के व्यावसायिक उपयोग की योजना।
छोटे कपड़ा उद्योगों को विकसित करने का प्रस्ताव तैयार।
जागरण संवाददाता, कानपुर। बंद पड़ी नेशनल टेक्सटाइल्स कारपोरेशन (एनटीसी) की पांच मिलों की जमीनों के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर कवायद शुरू हो गई है। एनटीसी के अधिकारियों के मुताबिक वस्त्र मंत्रालय के निर्देश पर मिलों की संपत्तियों का दोबारा मूल्यांकन और जमीनों की ऑनलाइन डेटा फीडिंग कराई जा रही है।
मिलों को दोबारा शुरू करने की संभावना नहीं होने के कारण अब रीस्ट्रक्चरिंग कार्यक्रम के तहत उनकी जमीन का व्यावसायिक उपयोग करने की योजना पर काम हो रहा है। इसमें कपड़ा क्षेत्र से जुड़े छोटे उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
एनटीसी की पांच मिलों के पास कुल 370.20 एकड़ जमीन है। इनमें मिल परिसर के साथ कर्मचारियों के आवास और अन्य संपत्तियां भी शामिल हैं। मंत्रालय स्तर पर इन संपत्तियों का पूरा ब्योरा जुटाया जा रहा है।
अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलों की जमीनों के संभावित व्यावसायिक उपयोग के विकल्प तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। प्रस्ताव के तहत कपड़ा उद्योग से जुड़े छोटे और मध्यम उद्यमों को विकसित करने पर विचार किया जा रहा है।
2021 में एनबीसीसी ने किया था मूल्यांकन
वर्ष 2021 में नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (एनबीसीसी) ने एनटीसी की मिलों का निरीक्षण कर सर्किल रेट के आधार पर जमीन का मूल्यांकन किया था। रिपोर्ट के अनुसार म्योर मिल की 49.20 एकड़ जमीन की कीमत 1090 करोड़, न्यू विक्टोरिया मिल की 31.35 एकड़ जमीन 512 करोड़, स्वदेशी काटन मिल की 67.36 एकड़ जमीन 1079 करोड़, लक्ष्मी काटन मिल की 76.57 एकड़ जमीन 1123 करोड़ और अर्थटन मिल की 15.50 एकड़ जमीन 127.75 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
उस समय के सर्किल रेट के मुकाबले मौजूदा दरों पर इन संपत्तियों का मूल्य करीब आठ हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं बाजार दर के आधार पर इन जमीनों की कीमत 12 से 15 हजार करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। नए मूल्यांकन के बाद वास्तविक कीमत और जमीन के उपयोग की संभावनाएं स्पष्ट होंगी।
नजूल जमीन पर सरकारी कार्यालयों की भी थी योजना
एनटीसी मिलों की जमीन के अलावा शहर में नजूल से संबंधित जमीनों के उपयोग को लेकर जिला प्रशासन ने तहसील, बाजार और मंडलीय सरकारी कार्यालय विकसित करने की योजना भी तैयार की थी। मिलों की जमीनों के पुनः अधिग्रहण का प्रयास भी किया गया था, लेकिन मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद मिलों की संपत्तियों का मामला लंबे समय तक लंबित रहा।
अब राज्य सरकार भी स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के माध्यम से जमीन से जुड़े विवादों और संपत्तियों के निस्तारण के विकल्प तलाश रही है। ऐसे में केंद्र की ओर से एनटीसी की जमीनों का दोबारा मूल्यांकन शुरू होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या बोले सांसद
कपड़ा मिलों के संचालन को लेकर केंद्रीय कपड़ा मंत्री से बीते दिनों मुलाकात की थी, इसके साथ ही मुख्यमंत्री के स्तर से भी मिलों के संचालन को लेकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। मिलों की जमीनों के उपयोग को लेकर संसद में प्राइ्रवेट बिल पेश किया है। खंडहर हो चुकी मिलों की जमीन का उपयोग कैसे हो सकता है, इसको लेकर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कार्ययोजना तैयार कर रही है,ताकि इन जमीनों से रोजगार मिल सकें। -रमेश अवस्थी, सांसद।
बोले कर्मचारी नेता
मिलों के संचालन को लेकर सरकार के पास कोई योजना नहीं हैं। अगर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम करें तो मिलें चल सकती है। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार की योजना को लागू करना चाहिए। वहां पर पुरानी मिलों की जमीनों को बेचकर नई मिलों की स्थापना की गई थी, इससे सभी को लाभ मिल सकता है। -रमाकांत यादव, कोषाध्यक्ष, यूपी टेक्सटाईल्स एसोसिएशन।
केंद्र और राज्य सरकार के पास मिलों की चलाने के लिए इच्छा शक्ति नहीं हैं। मिलों की जमीनों को हड़पने के लिए केवल योजनाएं बनाई जा रही हैं। सरकार को मजदूरों के हितों का ख्याल करना चाहिए। पहले केंद्र और राज्य के बीच मिलें फंसी रहीं, अब दोनों जगह सरकार होने के बाद भी कोई फैसला नहीं आ सका। -अजय सिंह, अध्यक्ष, लाल इमली कर्मचारी एसोसिएशन।
शासन के निर्देश पर सभी विवादित नजूल संपत्तियों का रिकॉर्ड संकलित कर भेजा गया है। जिन मामलों में कानूनी अड़चनें हैं, वहां विधिक राय लेकर आगे की कार्रवाई के लिए एसटीसी के सीईओ को रिपोर्ट भेजी गई है। विवादित मामलों के निस्तारण को लेकर अब एसटीसी से प्रयास किए जा रहे हैं। शासन के जो निर्देश आएंगे उनका अनुपालन किया जाएगा। -विवेक चतुर्वेदी, एडीएम वित्त एवं राजस्व।
