कानपुर, जागरण संवाददाता। होटल संचालकों ने सारे नियम और मानकों को ताख पर रख दिया है। एक महीने तक सौ से ज्यादा होटलों में कराई गई जांच में 41 फीसद में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति ही नहीं मिली। जलदोहन भी मनमाने तरीके से किया जा रहा था। इसकी रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को दी गई है।

होटलों की अव्यवस्था को लेकर पिछले दिनों एनजीटी ने जांच करने और रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। इसके बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय भूगर्भ जल आयोग और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तीन सदस्यीय टीम ने सर्वे किया था। बताते हैं कि 107 होटलों की जांच में 44 में बिना अनुमति भूगर्भ जल दोहन करने के साथ ही बिना प्राथमिक शोधन किए ही होटल से दूषित पानी व कचरा निकाला जा रहा था।

इन सभी में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का जल वायु सहमति पत्र भी नहीं था। कुछ जगह लगे जेनरेटर सेट मानक के अनुरूप नहीं थे जिससे वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ा मिला। इन सभी को सूचीबद्ध करने के साथ ही रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को भेजी गई है। अब वहां से मिले निर्देशों के अनुरूप इन सभी पर कार्रवाई करने की तैयारी है। 

ये हैं कुछ जरूरी तथ्य

पूरे शहर में कुल 166 होटल है, जिनमें से 107 होटलों में की गई थी जांच। जांच करने वाली टीम में 3 सदस्य थे।

ये सर्वे कुल 22 दिन तक चला जिसम

इन बिंदुओं पर की गई जांच

- जल दोहन के लिए केंद्रीय भूगर्भ जल आयोग की अनुमति है या नहीं।

- उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जल वायु सहमति पत्र लिया या नहीं। 

- निकलने वाले दूषित पानी के शोधन का इंतजाम है या नहीं।

- निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए क्या इंतजाम किए गए

- वायु प्रदूषण रोकने के लिए मानकों का पालन किया जा रहा या नहीं।

एनजीटी के निर्देश पर होटलों की जांच की गई थी। इसमें कई बड़े होटलों में भी मानक पूरे न होने की बात सामने आई है। इसकी रिपोर्ट एनजीटी को भेजी गई है। वहां से मिले दिशा-निर्देशों के अनुरूप काम किया जाएगा। - अमित मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

Edited By: Abhishek Agnihotri

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