जागरण संवाददाता, कानपुर : हकीकत की सतह से आंखें फेर कर कानपुर नगर निगम अपने इंतजामों पर झूठी वाहवाही लूटने में लगा है। शहर में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था में तमाम झोल मौजूद हैं, लेकिन इंदौर में आयोजित रीजनल वर्कशॉप में यहां के अधिकारियों ने कूड़ा उठान और निस्तारण की शहर में शानदार व्यवस्था होने की रिपोर्ट पेश कर दी। हकीकत उससे कहीं अलग है। कूड़े के ढेर तले प्लांट दबा है। पुराने बिल के भुगतान के चक्कर में काफी समय प्लांट बंद रहा। अब धीरे-धीरे काम शुरू हो पाया है।

इंदौर में यह किए दावे

दावा : कानपुर नगर निगम के 110 वार्डो में कूड़ा उठान किया जा रहा है। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कर प्लांट तक पहुंचाया जाता है।

ये है हकीकत : कूड़ा कलेक्शन का काम तो जेटीएम कंपनी को सौंपा गया है। लेकिन अभी तक बमुश्किल 80 वार्डो से ही डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन हो रहा है।

दावा : रेजीडेंसियल वेलफेयर एसोसिएशन तथा पार्को में वर्मी कंपोस्टिंग के लिए पर्याप्त संसाधन और मशीनरी उपलब्ध कराई गई है।

ये है हकीकत : अभी कुछ ही पार्को में इस व्यवस्था की शुरुआत हो सकी है। शहर के अधिकांश पार्क बदहाल पड़े हुए हैं।

दावा : प्लांट पर कूड़े का पृथक्कीकरण किया जाता है। गीले कचरे से वर्मी कंपोस्ट तैयार किया जाता है। जबकि सूखे कचरे से आरडीएफ और टाइल्स बनाए जाने का कार्य किया जा रहा है।

ये है हकीकत : मात्र 20-30 फीसद कूड़े का ही निस्तारण प्लांट पर हो रहा है। अभी सिर्फ वर्मी कम्पोस्ट बनाने का काम शुरू हो सका है।

By Jagran