कानपुर, जेएनएन। कानपुर में मेट्रो के प्राथमिक कारीडोर आइआइटी से मोतीझील के बीच चलाने के लिए आठ ट्रेनें आएंगी। इसकी पहली ट्रेन के तीन कोच शनिवार को गुजरात से रवाना हो गए। सुबह गोरखपुर में मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल हरी झंडी दिखाकर कोच को गुजरात के सवाली प्लांट से कानपुर के रवाना कराया। ये कोच 10-12 दिन में कानपुर में पॉलिटेक्निक स्थित डिपो पहुंच जाएंगे और यहां पर असेंबलिंग के बाद ट्रेन तैयार की जाएगी। इसके बाद पॉलिटेक्निक के पास बने डिपो में ट्रैक पर ट्रेन को चलाकर परीक्षण किया जाएगा, इसकी अधिकतम रफ्तार 90 किलोमीटर प्रतिघंटे रखी जाएगी।

नौ किमी लंबा है प्राथमिक कॉरीडोर

कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के अंतर्गत यह प्राथमिक कारीडोर नौ किलोमीटर लंबा है। इस कारीडोर का काम 15 नवंबर 2019 में शुरू हुआ था। कानपुर के लोगों को शहर में मेट्रो ट्रेन के आने का लंबे समय से इंतजार था और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक कुमार केशव पहले ही कह चुके थे कि सितंबर के अंत तक मेट्रो के कोच कानपुर में हर हालत में आ जाएंगे।शनिवार को गुजरात के प्लांट से मेट्रो के कोचों की रवानगी हुई तो वहां मेट्रो एमडी कुमार केशव खुद मौजूद रहे।

कानपुर में प्राथमिक कारीडोर आइआइटी से मोतीझील के बीच में है, जिसमें नौ स्टेशन हैं। फिलहाल मेट्रो के तीनों कोच को पालिटेक्निक स्थित डिपो में लाने के बाद परीक्षण किया जाएगा। कोच एसेंबेलिंग के लिए डिपो के अंदर सभी प्रमुख मशीनों को लगाया जा चुका है। पहली मेट्रो के आने के बाद अगले कुछ दिन में प्राथमिक कारीडोर के लिए बाकी मेट्रो भी आ जाएंगी। 15 नवंबर 2021 को इसका ट्रायल रन शुरू करना है। जनवरी 2022 में आम जनता के लिए मेट्रो को शुरू कर दिया जाएगा।कानपुर के प्राथमिक सेक्शन के लिए आठ मेट्रो ट्रेनें चलेंगी। इसके बाद कानपुर के दोनों कारीडोर में कुल 39 ट्रेनें संचालित होंगी और सभी में तीन-तीन कोच होंगे।

कानपुर की मेट्रो ट्रेन की विशेषताएं

1-इन ट्रेनों में ‘रीजेनरेटिव ब्रेकिंग’ का फ़ीचर होगा, जिसकी मदद से ट्रेनों में लगने वाले ब्रेक से 45 पीसद तक ऊर्जा को रीजेनरेट करके फिर से सिस्टम में इस्तेमाल कर लिया जाएगा। वायु-प्रदूषण को कम करने के लिए इन ट्रेनों में अत्याधुनिक ‘प्रापल्सन सिस्टम’ रहेगा।

2-इन ट्रेनों में कार्बन-डाई-आक्साइड सेंसर आधारित एयर कंडीशनिंग सिस्टम होगा, जो ट्रेन में मौजूद यात्रियों की संख्या के हिसाब से चलेगा और ऊर्जा की बचत करेगा।

3-आटोमैटिक ट्रेन आपरेशन को ध्यान में रखते हुए ये ट्रेनें संचारित आधारित ट्रेन नियंत्रण प्रणाली से चलेंगी।

4-कानपुर मेट्रो की ट्रेनों की यात्री क्षमता 974 यात्रियों की होगी।

5-इन ट्रेनों की डिज़ाइन स्पीड 90 किमी प्रति घंटा और आपरेशन स्पीड 80 किमी प्रति घंटा तक होगी।

6-ट्रेन के पहले और आख़िरी कोच में दिव्यांगों की व्हीलचेयर के लिए अलग से जगह होगी। व्हीलचेयर के स्थान के पास ‘लांग स्टाप रिक्वेस्ट बटन’ होगा, जिसे दबाकर दिव्यांग ट्रेन आपरेटर को अधिक देर तक दरवाज़ा खुला रखने के लिए सूचित कर सकते हैं ताकि वे आराम से ट्रेन से उतर सकें।

7-ट्रेनों में अग्निशमन यंत्र, स्मोक डिटेक्टर्स और सीसीटीवी कैमरे भी लगे होंगे।

8-कानपुर की मेट्रो ट्रेनें थर्ड रेल यानी पटरियों के समानांतर चलने वाली तीसरी रेल से ऊर्जा प्राप्त करेंगी, इसलिए इसमें खंभों और तारों के सेटअप की आवश्यकता नहीं होगी और बुनियादी ढांचा बेहतर और सुंदर दिखाई देगा।

9-इन ट्रेनों को अत्याधुनिक फायर और क्रैश सेफ्टी के मानकों के आधार पर डिजाइन किया गया है।

10-हर ट्रेन में 24 सीसीटीवी कैमरे होंगे, जिनका वीडियो फीड सीधे ट्रेन आपरेटर और डिपो में बने सेंट्रल सिक्योरिटी रूम में पहुंचेगा।

11-हर ट्रेन में 56 यूएसबी चार्जिंग प्वाइंट होंगे।

12-हर ट्रेन में 36 एलसीडी पैनल्स भी होंगे।

13-टाक बैक बटन को दबाकर यात्री आपात स्थिति में ट्रेन आपरेटर से बात कर सकते हैं। यात्री की लोकेशन और सीसीटीवी का फुटेज सीधे ट्रेन आपरेटर के पास मौजूद मानीटर पर दिखाई देगा।

Edited By: Abhishek Agnihotri