तस्करी का सोना और काला धन खपाने वालों पर नकेल की तैयारी, पंजाब में कार्रवाई के बाद कानपुर पर नजर
कानपुर में तस्करी के सोने और काले धन को फर्जी फर्मों के जरिए खपाने वालों पर राज्य कर विभाग ने ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।
HighLights
तस्करी के सोने और काले धन पर विभाग की कड़ी नजर।
फर्जी फर्मों के जरिए काले धन को सफेद करने का खेल।
सराफा और रियल एस्टेट कारोबारियों पर विशेष ऑडिट की तैयारी।
जागरण संवाददाता, कानपुर। तस्करी के सोने और काले धन को खपाने के लिए फर्जी फर्मों के इस्तेमाल के खेल पर नकेल की तैयारी है। पंजाब में 3,742 करोड़ रुपये का जीएसटी घोटाला उजागर होने के बाद राज्य कर विभाग ने सराफा और बुलियन कारोबार पर निगाहें तेज कर दी हैं। संदिग्ध खरीद-फरोख्त में शामिल कुछ कारोबारियों को चिह्नित किया गया है।
विभाग को ऐसी सूचना मिली है कि यहां अर्से से फर्जी बिक्री रसीदों के जरिये न केवल तस्करी के सोने और काले धन को खपाया जा रहा है, बल्कि फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) भी हासिल किया जा रहा है। विभाग सराफा कारोबार के साथ कानपुर में रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारियों के फर्म का विशेष आडिट भी करेगा।
इस पूरे खेल में अबकी पर्दे के पीछे रहकर नेटवर्क संचालित करने वाले बड़े खिलाड़ियों पर दबिश की तैयारी है। आयात पर टैक्स बढ़ने के बाद से चोरी-छिपे या तस्करी कर देश में सोना मंगाने के मामले बढ़े हैं। पिछले दिनों कन्नौज में ही एक्सप्रेसवे पर करीब 10 किलोग्राम सोना पकड़ा गया था, जो नेपाल से दिल्ली ले जाया जा रहा था।
इस बीच वस्तु एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआइ) की अमृतसर इकाई की बीते सप्ताह हुई कार्रवाई से स्पष्ट हो गया है कि सराफा और बुलियन कारोबार में बड़ा खेल चल रहा है। कानपुर में तस्करी के सोने और काले धन को खपाने के लिए मुखौटा कंपनियों के इस्तेमाल और फर्जी बिलों के जरिये इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) हड़पने का खेल लंबे समय से चलने की आशंका है।
जानकारों के मुताबिक, इस नेटवर्क में बड़े और शातिर खिलाड़ी शामिल हैं, जो सामान्य लोगों को प्रलोभन देकर उन्हें मोहरा बनाकर तस्करी के सोने की कमाई को मुखौटा कंपनियों के जरिये घुमाते हैं और फर्जी बिलों से आइटीसी का लाभ उठाते हैं। जीएसटी और आयकर के अलग-अलग नियमों की विसंगतियों का भी लाभ भी बुलियन कारोबारी उठा रहे हैं।
नोटबंदी के दौरान पुराने नोट लेकर सोना बेचने के मामले सामने आए थे। गंभीरता से जांच होती तो सच्चाई सामने आ जाती, मगर ऐसा नहीं हुआ। वर्ष 2018 में सामने आए चर्चित मामले में नोटबंदी के दौरान कमीशन के बदले करीब 42 किलो सोना खरीदकर कालेधन को सफेद करने का आरोप लगा था। आयकर विभाग की डाटा माइनिंग में लेनदेन सामने आने के बाद मामला खुला था।
आयकर विभाग ने 2023 में भी सराफा और रियल एस्टेट कारोबारियों के 17 ठिकानों पर छापेमारी की थी। करीब पांच दिन चली कार्रवाई में लगभग 1,500 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन, 200 करोड़ रुपये की अघोषित आय, 270 करोड़ रुपये की बोगस सोना खरीद और करीब 100 करोड़ रुपये की कर चोरी से जुड़े तथ्य सामने आए थे। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि पुलिस में दर्ज पुराने मामलों की समीक्षा की जाएगी।
